परिषदीय स्कूल की शिक्षिका को राष्ट्रपति ने बुलाया


प्रतापगढ़। तिथि 13 जनवरी, समय दोपहर ठीक 12 बजे, स्थान विकास खंड मंगरौरा का प्राथमिक विद्यालय बहरूपुर। सहायक अध्यापिका छाया सिंह पत्नी विकास सिंह के पर्स में रखा मोबाइल अचानक घनघनाने लगा। कॉल रिसीव होते ही दूसरी ओर से आवाज आई मैं राष्ट्रपति भवन से महामहिम का पर्सनल असिस्टेंट अमरजीत सिंह बोल रहा हूं। क्या आपका नाम छाया सिंह है, जवाब हां में मिलते ही दूसरी ओर से कहा गया कि महामहिम आपसे बात करना चाहते हैं। मैं ठीक पांच मिनट बाद दोबारा आपको काल करूंगा।




पांच मिनट के समय में ही अध्यापिका छाया सिंह समझ चुकी थीं कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उनसे हाल-चाल पूछना चाहते हैं। दरअसल अध्यापिका के दिवंगत पिता रिजर्व बैंक कानपुर में ऑफीसर थे और तब रामनाथ कोविंद से उनके घरेलू सम्बंध थे। राष्ट्रपति बनने से पहले रामनाथ कोविंद अक्सर अध्यापिका के घर उनके पिता से मिलने आते थे। हालांकि छाया को समझ में नहीं आया कि राष्ट्रपति को उनका मोबाइल नंबर कहां से मिला होगा। इतनी ही देर में छाया सिंह का फोन फिर से घनघनाने लगा। रिसीव होते ही दूसरी ओर से आवाज आई बेटा छाया, कैसी हो। अध्यापिका ने राष्ट्रपति को प्रणाम करने के बाद कुशलता बताई। दूसरी ओर से पूछा गया मुझसे मिलने कब आ रही हो। अध्यापिका कोई जवाब देतीं, इससे पहले ही राष्ट्रपति ने अपनत्व से कहा, कोई जल्दी नहीं है, घर जाकर राय मशविरा करने के बाद बताना। इसके बाद उन्होंने छाया सिंह से उनके परिवार के एक-एक सदस्य की कुशलता पूछी। पांच मिनट तक बातचीत के बाद उन्होंने कहा कि एक सप्ताह में इसी नंबर पर फोन कर बता देना कब आना है, इसके बाद उन्होंने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया।

21 मार्च को मुलाकात की तिथि निर्धारित
राष्ट्रपति भवन के अप्वाइटमेंट हाउस से बीच-बीच में अध्यापिका छाया सिंह के पास फोन आता रहा लेकिन किसी न किसी कारण से राष्ट्रपति से मुलाकात की तिथि तय नहीं हो पा रही थी। 10 मार्च को आए फोन पर होली के बाद की तिथि निर्धारित करने के लिए कहा गया। इसके बाद 21 मार्च सुबह 11 बजे राष्ट्रपति से मुलाकात का समय निर्धारित हो गया। ट्रेन का टिकट बुक कराने के लिए अध्यापिका व उनके परिजनों की डिटेल 14 मार्च तक मांगी गई है।