बिना दस्तावेजी आधार के शपथपत्र दाखिल न करें अधिकारी: हाई कोर्ट

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों को आगाह किया है कि वह दस्तावेजी आधार पर ही न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल करें। कहा कि बिना दस्तावेजी आधार के अधिकारियों द्वारा शपथ पत्र देना स्वस्थ परंपरा नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति ए आर मसूदी ने पुलिस भर्ती 2015 की अभ्यर्थी शालू वर्मा की याचिका पर दिया।



 न्यायालय ने वर्ष 2015 के पुलिस भर्ती में चयनित याची द्वारा जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए जाने के बावजूद उसे ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने को अधिकारियों का मनमाना कदम करार दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना दस्तावेजों की सही तरीके से जांच किए याची को उसके अधिकार से वंचित किया गया। याची 2015 की पुलिस भर्ती में शामिल हुई परीक्षा के सभी चरणों में उसने सफलता प्राप्त की और चयनित हो गई उसे ओबीसी वर्ग के कटआफ अंक 410.6 से अधिक 417.1 अंक मिले थे। मगर दस्तावेजों के सत्यापन के समय आवेदन के समय वाला जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर सकी। मामले में कोर्ट ने पुलिस भर्ती बोर्ड के अपर सचिव को दस्तावेजों के साथ तलब किया था।



 दस्तावेजों के परीक्षण पर अदालत ने पाया कि परीक्षण रिपोर्ट में या कहीं नहीं कहा गया है कि याची ने 4 फरवरी 2016 को जारी जाति प्रमाण पत्र नहीं प्रस्तुत किया है। न्यायालय ने कहा कि हम यह समझने में नाकाम है कि कोई अभ्यर्थी जिसने आवेदन के समय मूल दस्तावेज प्रस्तुत किया था वह दस्तावेजों के सत्यापन के समय उसे क्यों नहीं प्रस्तुत करेगा? कोर्ट ने कहा कि भर्ती बोर्ड की ओर से प्रस्तुत हलफनामे में इस बात का कोई आधार नहीं है कि याची ने मूल दस्तावेज नहीं प्रस्तुत किया है।

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