कम हो गए शिक्षकों के 1.39 लाख पद:-:शिक्षा मंत्रालय ने राज्यसभा में एक सवाल पर दिया जवाब, एक साल में ही बड़े पैमाने पर संख्या घटी


उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की संख्या एक साल में 1.39 लाख कम हो गई। बेसिक शिक्षा विभाग के चौंकाने वाले आंकड़े शिक्षा मंत्रालय ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में दो अगस्त को प्रस्तुत किया है। जवाब में 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में शिक्षकों के स्वीकृत, कार्यरत और रिक्त पदों की सूचना दी गई है। इसके मुताबिक 2021-22 में जहां शिक्षकों के स्वीकृत पदों की संख्या 7,19,399 थी वहीं 2022-23 में 5,79,622 रह गई। साफ है कि एक साल में ही पदों की संख्या में 1,39,777 कमी हो गई।


पदों की संख्या कम होने का सीधा असर शिक्षकों के रिक्त पद में देखने को मिलता है। 2021-22 में रिक्त पदों की संख्या जहां 2,65,805 थी वहीं 2022-23 में घटकर 1,26,028 रह गई। यानि रिक्त पदों में कमी भी 1,39,777 की ही हुई है। आश्चर्य की बात है कि कोरोना काल में बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी जाने, व्यापार चौपट होने और अन्य कारणों से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ी है। इस लिहाज से शिक्षकों के पदों की संख्या भी बढ़नी चाहिए। जबकि इसके उलट स्वीकृत पद 1.39 लाख कम हो गए।




निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अनुसार किन्ही भी परिस्थितियों में कुल सृजित पदों के सापेक्ष 10 से अधिक सीटों को रिक्त नहीं रखा जा सकता। जबकि विभिन्न जनपदों से प्राप्त डाटा के अनुसार लगभग प्रत्येक जिले में 35 से 48 पद रिक्त हैं। साढ़े चार साल से नई भर्ती नहीं आने के कारण शिक्षकों के रिक्त पदों की संख्या बढ़ती जा रही है।
इन्दुभाल तिवारी, नई भर्ती के लिए हाईकोर्ट में याचिका करने वाला बेरोजगार


मुख्यमंत्री के निर्देश पर छात्रों का सत्यापन आधार संख्या से कराने के कारण नामांकन कम हुआ है। उसके कारण ही शिक्षकों के पद भी कम हुए हैं।
-विजय किरन आनंद, महानिदेशक स्कूल शिक्षा