यूपी में जिलों का अपना गजेटियर फिर से बनेगा


लखनऊ। जिले की जानकारियां सटीक और बेहतर ढंग से गजेटियर में मिलेंगी। इसके लिए फिर से जिलों का गजेटियर तैयार होगा। लखनऊ और मुरादाबाद मॉडल जिले बनेंगे, जिनका गजेटियर 20 अप्रैल 2024 तक तैयार हो जाएगा। इन दोनों जिलों में इसके लिए काम शुरू हो चुका है। लखनऊ जिले में गजेटियर के लिए बनी कमेटी की पहली बैठक 11 नवम्बर को होगी।


इस बनने जा रहे गजेटियर में 19 के बजाय 11 अध्याय होंगे, जिसका विवरण विस्तार से होगा। पुराने गजेटियरों की कमियों को तथ्यों के आधार पर दूर किया जाएगा। प्रश्नावली के आधार पर सूचनाएं इकह्वा करने के लिए मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की ओर से 11 नवम्बर तक का समय दिया गया है। इन सूचनाओं को पुख्ता करने के बाद टाइपिंग 11 दिसम्बर तक पूरी करनी होग। टाइपिंग से मिलान के बाद तैयार ड्राफ्ट के जांच सीमा 30 दिसम्बर है। पूरी पड़ताल के बाद तैयार ड्राफ्ट की जांच 29 फरवरी तक जिला गजेटियर विभाग को पूरी करनी होगी। इसके बाद इसे 31 मार्च तक अंतिम रूप दिया जाएगा।

गजेटियर की कहानी, उसकी ही जुबानी अभी तक जो गजेटियर है वह 1959 में बनाया गया था। गजेटियर की कहानी खुद इसी में दर्ज है। इसे तैयार करवाने वाले आईएएस वीसी शर्मा ने शुरुआत में गजेटियर से संबंधित पूरी जानकारी दी है। जनवरी 1953 में सरकार ने स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास संकलित करने के लिए संपादक मंडल गठित किया था। राज्य सरकारों से गजेटियर के लिए समितियां गठित करने को कहा गया था। इन समितयों को अपने क्षेत्र से जुड़ी घटनाओं की सामग्री इकह्वा करनी थी। विशेष तौर पर जो 15 अगस्त 1947 तक घटित हुई थीं। उत्तर प्रदेश सरकार ने 1955 में जिला गजेटियर्स को संशोधित करने का निर्णय लिया।



1872 में शुरू हुई कोशिश

गजेटियर्स के अनुसार इसका अस्तित्व 1872 तक नहीं था। तब तत्कालीन इम्पीरियल गजेटियर्स की परिकल्पना की गई। भारत में इसके लिए योजना बनाई। इसके बाद हर जिले के लिए गजेटियर जुटाए। पहला प्रकाशन 1872 में हुआ जो 10 वर्षों तक चला। तब उत्तर प्रदेश को अंग्रेज अवध कहते थे। इसी आधार पर दो खंड में ‘अवध’ गजेटियर बना। जिला गजेटियर का पुनरीक्षण दोबारा किया गया, क्योंकि पिछले की बातें पुरानी हो गई थीं। 10 वर्षों में हर जिले के अलग खंड संकलित और प्रकाशित किए गए। प्रत्येक जनगणना के बाद 1915, 1926, 1934 में पूरक प्रभगीय खंड का प्रकाशन हुआ।