राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुरूप मूल्यांकन व्यवस्था को बेहतर बनाने और देश के अन्य स्कूल शिक्षा बोर्डों के मूल्यांकन मानकों के साथ समानता सुनिश्चित करने के लिए यूपी बोर्ड ने परख प्रकोष्ठ का गठन किया है।
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इस प्रकोष्ठ के गठन से यूपी बोर्ड से जुड़े 29 हजार से अधिक स्कूलों में 12वीं तक के एक करोड़ से छात्र-छात्राओं की पठन-पाठन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इसके माध्यम से एनईपी-2020 के सापेक्ष मूल्यांकन संबंधी सुधार, बाह्य प्रशिक्षणों पर निर्भरता की बजाय आंतरिक क्षमता में वृद्धि और मूल्यांकन प्रविधियों में निरन्तरता, प्रासंगिकता व निजता स्थापित की जाएगी। उत्तर प्रदेश राज्य के पाठ्यक्रम व आवश्यकता के आधार पर राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएप) को ग्रहण करने के साथ ही यह प्रकोष्ठ नोडल संस्था के रूप में एनसीईआरटी, एससीईआरटी और अन्य शैक्षिक संस्थानों के मध्य समन्वय स्थापित करने का काम करेगा। यूपी बोर्ड के अपर सचिव (शोध) स्कंद शुक्ल ने बताया कि यह माध्यमिक विद्यालयों की मूल्यांकन व्यवस्था को मानकीकृत करने के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वालों, संदर्भदाता, मूल्यांकनकर्ताओं, शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। साथ ही मूल्यांकन प्रक्रिया में वैधता, विश्वसनीयता और पारदर्शिता को बढ़ावा देंगे।
प्रकोष्ठ के यह भी कार्य
● दक्षता आधारित प्रश्न पत्र
● रूब्रिक्स और स्कोरिंग गाइड्स
● लर्निंग आउटकम्स के सापेक्ष पाठ्य वस्तु/प्रश्न बैंक
● बहुआयामी प्रगति पत्र
सचिव प्रकोष्ठ के अध्यक्ष
12 सदस्यीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह हैं जबकि अपर सचिव (शोध) को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। उप सचिव (शोध) परख समन्वयक की जिम्मेदारी निभाएंगे। प्रकोष्ठ के अन्य सदस्यों में यूपी बोर्ड, एससीईआरटी तथा शैक्षणिक एवं शिक्षा संबंधी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनमें सीमैट, सआईईएमएटी और समग्र शिक्षा माध्यमिक के अधिकारी भी शामिल हैं।
प्रकोष्ठ राज्य की आंतरिक मूल्यांकन क्षमता को मजबूत करने, बाहरी प्रशिक्षण पर निर्भरता कम करने और प्रक्रिया में निरंतरता तथा निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। -भगवती सिंह, सचिव यूपी बोर्ड

