नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को देशभर के स्कूलों में सुबह की एसेंबली के दौरान संविधान की प्रस्तावना के पाठ को अनिवार्य बनाने के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रस्तावना पहले से ही स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा है और इसे छठी कक्षा से ही छात्रों को पढ़ाया जाता है।
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न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज में सहायक आचार्य धीरज कुमार की ओर से दाखिल याचिका खारिज कर दी। याचिका में स्कूली बच्चों में संवैधानिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की गई थी।

