13 October 2026

UP Basic Teacher Leave Rules: बेसिक शिक्षकों के अवकाश नियमों पर शासनादेश, हाईकोर्ट के आदेश का मामला, जानें अवकाश नियमों की पूरी जानकारी

 

UP Basic Teacher Leave Rules: बेसिक शिक्षकों के अवकाश नियमों पर शासनादेश, हाईकोर्ट के आदेश का मामला

यूपी बेसिक शिक्षकों के अर्जित अवकाश मामले में 1 अगस्त 2024 के शासनादेश, रिट याचिका 511/2024, हाईकोर्ट के निर्देश और शिक्षकों के अवकाश नियमों की जानकारी पढ़ें।

यूपी के बेसिक शिक्षकों के अर्जित अवकाश का मामला: शासन ने हाईकोर्ट में रखा अपना पक्ष, जानें अवकाश नियमों की पूरी जानकारी

UP Basic Teacher Earned Leave News: उत्तर प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों को दिल्ली सरकार और केंद्रीय विद्यालयों के शिक्षकों के समान अवकाश दिए जाने की मांग से जुड़े मामले में शासन ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया था। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दाखिल रिट याचिका संख्या 511/2024 से संबंधित है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों के अर्जित अवकाश (Earned Leave) का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस प्रकरण में शिक्षकों की ओर से दिल्ली सरकार द्वारा संचालित विद्यालयों तथा केंद्रीय विद्यालयों के शिक्षकों के समान अवकाश सुविधाएं दिए जाने की मांग की गई थी।

उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, उत्तर प्रदेश शासन के बेसिक शिक्षा अनुभाग-5 ने 1 अगस्त 2024 को इस संबंध में अपना पक्ष प्रस्तुत किया। यह मामला उपेंद्र मणि मिश्र एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य से संबंधित रिट याचिका संख्या 511/2024 से जुड़ा है।

हाईकोर्ट ने 23 जनवरी 2024 को क्या आदेश दिया था?

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 23 जनवरी 2024 को पारित आदेश में याचिकाकर्ताओं के 29 अप्रैल 2023 के प्रत्यावेदन पर कानून के अनुसार तीन महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। प्रत्यावेदन पर संबंधित नियमों, सरकारी आदेशों और मामले के तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी।

इसलिए हाईकोर्ट के इस आदेश को शिक्षकों को तत्काल अर्जित अवकाश देने का आदेश मानना सही नहीं होगा।

शासन ने अपने पक्ष में क्या कहा?

1 अगस्त 2024 के उपलब्ध शासनादेश में उत्तर प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों और दिल्ली सरकार के कर्मचारियों की अवकाश व्यवस्था की तुलना की गई है।

शासन के पक्ष में यह बताया गया कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों की सेवा शर्तें और अवकाश संबंधी नियम संबंधित विभागीय आदेशों एवं नियमावलियों से संचालित होते हैं। केवल दूसरे संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर समान अवकाश का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं हो जाता।

दस्तावेज के अंतिम पृष्ठ में उपलब्ध निष्कर्ष के अनुसार, समान अवकाश की मांग से संबंधित प्रत्यावेदन को स्वीकार न किए जाने का पक्ष रखा गया है।

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षकों को मिलने वाले प्रमुख अवकाश

दस्तावेज में उत्तर प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों की अवकाश व्यवस्था का उल्लेख करते हुए निम्नलिखित प्रमुख श्रेणियां दिखाई गई हैं:

अवकाश का प्रकारदस्तावेज में उल्लिखित व्यवस्था
राजपत्रित अवकाशनियमानुसार अनुमन्य अवकाश
आकस्मिक अवकाश (CL)14 दिन
ग्रीष्मावकाश20 मई से 15 जून
शीतकालीन अवकाश31 दिसंबर से 14 जनवरी
चिकित्सकीय अवकाशसंबंधित सेवा नियमों के अनुसार
मातृत्व एवं अन्य विशेष अवकाशलागू नियमों एवं शासनादेशों के अनुसार

महत्वपूर्ण: ऊपर दी गई सूची दस्तावेज में दिखाई देने वाली व्यवस्था का सार है। यह सभी वर्तमान अवकाशों की संपूर्ण या नवीनतम आधिकारिक सूची नहीं है। किसी अवकाश की पात्रता और अवधि के लिए संबंधित नवीनतम शासनादेश देखना आवश्यक है।

क्या शिक्षकों को अर्जित अवकाश (EL) नहीं मिलेगा?

इस मामले का मुख्य विषय यही है। शिक्षकों की मांग दूसरे संस्थानों के समान अर्जित अवकाश की सुविधा से संबंधित थी। हालांकि, इस दस्तावेज के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए कि प्रत्येक परिस्थिति में किसी भी प्रकार का अर्जित अवकाश पूरी तरह प्रतिबंधित है।

अर्जित अवकाश की पात्रता, ग्रीष्मावकाश या शीतावकाश में विभागीय आदेश पर किए गए कार्य के बदले मिलने वाले अवकाश तथा अन्य परिस्थितियों के लिए अलग-अलग नियम और विभागीय निर्देश लागू हो सकते हैं।

शिक्षकों के लिए क्या है महत्वपूर्ण?

इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने सरकार को प्रत्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया था। शासन के उपलब्ध दस्तावेज में समान अवकाश की मांग पर अपना पक्ष रखा गया है। इसे सभी शिक्षकों के लिए जारी नया अवकाश आदेश या सभी प्रकार के अर्जित अवकाश पर सार्वभौमिक प्रतिबंध के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

शिक्षकों को अवकाश से संबंधित किसी दावे या आवेदन के लिए लागू सेवा नियमों और नवीनतम विभागीय आदेशों को आधार बनाना चाहिए।

निष्कर्ष: 69000 भर्ती जैसे अन्य सेवा संबंधी मामलों से अलग, यह प्रकरण विशेष रूप से बेसिक शिक्षकों की अवकाश सुविधाओं और अर्जित अवकाश की मांग से जुड़ा है। हाईकोर्ट का 23 जनवरी 2024 का आदेश प्रत्यावेदन पर निर्णय लेने के संबंध में था, जबकि 1 अगस्त 2024 का दस्तावेज शासन का पक्ष/निर्णय संबंधी पत्र है।





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