पेंशन की टेंशन में जी रहे हैं सरकारी कर्मचारी


कानपुर देहात: हिमाचल चुनाव परिणाम के बाद से एक ट्रेंड महसूस कर रहा हूं आप भी देख ही रहे होंगे कि एक मिडिया का वर्ग सतत प्रयास कर रहा है कि कैसे भी करके आम जनता को सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध खड़ा कर दिया जाए। पुरानी पेंशन की खामियों को लेकर लगातार डिबेट हो रही हैं सबको बताया जा रहा है कि इतना भार आ जायेगा पुरानी पेंशन बहाल होगी तो, देश की अर्थव्यवस्था टूट जायेगी, देश पीछे चला जायेगा प्रलय आ जायेगा लेकिन यह देश वह समय नहीं भूला जब कोरोना आया तब यही सफाई कर्मी थे जिन्होंने सफाई का जिम्मा उठाया था, यही डॉक्टर फार्मासिस्ट, स्टाफनर्स, वार्ड बॉय थे जो संक्रमित का इलाज कर रहे थे, यही शिक्षक थे जो कहीं रेलवे स्टेशन, कोविड कंट्रोल रूम में बैठे थे, यही पुलिस कर्मी थे जो जान की बाजी लगाकर खुले में घूम रहे थे, हमारे सेना, अर्द्ध सैनिक बल के जवान देश सुरक्षा मे लगे थे. हमारे विद्युत जल विभाग के कर्मचारी अनवरत सेवा प्रदान करते रहे थे। इस भीषण परिस्थिति में कई कर्मचारी बीमार हुए, हजारों शहीद भी हुए।



आज जब उन्हें रिटर्न गिफ्ट देने की बात आई तो कुछ मूर्ख लोग इन्हें बोझ समझने लगे। ऐसा भी नहीं है कि कोई अनोखी चीज मांग रहे हो कर्मचारी जब से देश आजाद हुआ तब से 2004 तक देश ने पुरानी पेंशन दी तब क्या देश का विकास नहीं हुआ था, तब देश ने अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल नहीं की थीं। आज जब आप पुरानी पेंशन मांग के बारे में सोचें तो यह भी सोचिएगा कि जब जागते हैं तो बिजली, पानी,शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, यहां तक कि नालियां साफ करने में किसके हाथ गंदे हो रहे हैं कौन लोग हैं जो बिना किसी प्रोत्साहन के सतत कार्य किए जा रहे हैं। 20-50 हजार की नौकरी पर सरकारी कर्मचारी अपने जीवन, अपनी खुशियों को झोंक कर देश सेवा कर रहा है, जिम्मेदारियां उठा रहा है तो क्या देशवासी इतने सक्षम नहीं है कि इन कर्मचारियों के बुढ़ापे पर इनका सहारा बन सकें। कर्मचारियों को एक सशक्त और आत्मनिर्भर बुढ़ापा सकें। कल को आपके घर में भी कोई सरकारी कर्मचारी बनेगा तो भी उसे यही तर्क दिए जाएंगे। खैर यह कोई राजनैतिक मुद्दा न था, न है, न होगा, यह आजीविका का मुद्दा है जिसे लोगों को समझने की आवश्यकता है। अब बात यह बनती है कि अगर नई पेंशन ज्यादा अच्छी है तो नेता लोग पुरानी पेंशन का त्याग क्यों नहीं कर रहे हैं और सरकारी कर्मचारी अगर पुरानी पेंशन की मांग कर रहे हैं तो सरकार उन्हें क्यों नहीं दे रही है। वह अच्छी हो या खराब सरकारी कर्मी को जब वह बेहतर लग रही है तो सरकार को पुरानी पेंशन बहाल करने में क्या परेशानी है.