शिक्षक मांग रहे थे ‘माहौल’ मिल रहे नित नए फरमान, आदेशों की पोटली में दबे हैं शिक्षक


 फतेहपुर : दशकों पहले जब दूर दराज के गांवों में एक स्कूल होता था तो वहां समाज के सभी वर्गो के लोग अपने बच्चों को उसी सरकारी स्कूल में भेजते थे। शिक्षकों के पास न तो मिड डे मील था और न ही पोलियो। अब मामला उलट गया है। स्कूलों में शिक्षकों को पहले से ही आदेशों की पोटली थमा दी गई है। बता दिया गया है कि आज यह करना है, कल वह करना है। अभी इस तरह पढ़ाना है, इतना पढ़ाना है। शिक्षक कई औपचारिकताओं और गैर सरकारी कार्यो के बीच उलझ कर रह गए हैं। बेसिक शिक्षकों के हालातों की पड़ताल करती एक रिपोर्ट..






शिक्षकों के गैर शैक्षणिक कार्यों ने बढ़ाई मुश्किलें



सरकार व विभाग के तमाम दावों के बावजूद बेसिक शिक्षक गैर शैक्षणिक कार्यों में उलझे दिख रहे हैं। डीबीटी आने के बाद शिक्षकों के ही मोबाइल फोन व इंटरनेट डाटा से खातों की फीडिंग, बच्चों की फोटो अपलोड व सत्यापन जैसे काम किए जा रहे हैं। अब यू डायस प्लस, जनगणना जैसा परिवार सर्वेक्षण, सामाजिक सुरक्षा योजना रजिस्टर जैसे नए कार्य फेहरिश्त में शामिल हो गए हैं।




आदेशों की पोटली में दबे हैं शिक्षक



सूत्र बताते हैं कि शायद ही ऐसा कोई दिन होता होगा जब कोई नया आदेश सामने न आता होगा। एक आदेश पर अमल नहीं हो पाता, दूसरा हाजिर हो जाता है। शिक्षक सूचनाएं देते परेशान हैं। उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।