पीएम स्वनिधि योजना के 75 लाभार्थी गैर सामान्य वर्ग से, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने एक रिसर्च रिपोर्ट जारी की है


प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के बढ़ते प्रभाव और समाज के वंचित कहे जाने वाले वर्ग को खास तौर पर सहायता देने को लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने एक रिसर्च रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बताया गया कि योजना के करीब 75 फीसदी कर्ज पाने वाले लाभार्थी गैर सामान्य श्रेणी से हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वेबसाइट नरेंद्र मोदी डॉट इन पर इसे साझा किया गया है। साथ ही पीएम ने इसे एक्स भी किया है।



आंकड़ों के माध्यम से इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि ओबीसी श्रेणी के लोगों को इस योजना के जरिए 44 फीसदी रकम दी गई है वहीं एससी और एसटी वर्ग को 22 फीसदी फायदा मिला है। कुल लाभार्थियों में से 43 फीसदी महिला रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि महिलाओं की हिस्सेदारी शहरी महिलाओं की उद्यमशीलता क्षमताओं के सशक्तीकरण का प्रमाण हैं और स्वनिधि योजना को लिंग समानता का टैग मिलता है।

पहला लोन चुका कर दूसरा लेने वाले भी बढ़े इस योजना में पहला लोन चुकाकर दूसरा और लोन लेने वालों की संख्या में भी अच्छा खासा इजाफा देखने को मिला है। समय से लोन चुकाने वालों को सरकार की तरफ से 7 फीसदी की ब्याज सब्सिडी मिलती है। साथ ही डिजिटल लेन देन पर 1200 रुपये तक के कैशबैक की भी व्यवस्था है।

लोगों के खर्च की क्षमता बढ़ी अब तक तीन किश्तों में लोगों को 9100 करोड़ रुपए के करीब 70 लाख कर्ज बाटें जा चुके हैं। इससे 53 लाख से ज्यादा फुटपाथ विक्रेताओं को लाभ हुआ है। इस योजना का लाभ उठाने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति कितनी बदली है इसका अंदाजा उनके बढ़ते खर्च से लगाया जा सकता है। आंकड़े बताते हैं कि पीएम स्वनिधि योजना खाता धारक का औसत डेबिट कार्ड खर्च वित्तवर्ष 2021 के मुकाबले 2023 में 50 फीसदी बढ़कर 80 हजार रुपए तक पहुंच गया है।

इस योजना के तहत कर्ज लेने वाले लोगों में 5.9 लाख देश के 6 बड़े शहरों अहमदाबाद, मुंबई, चेन्नई, सूरत, बंगलुरू और हैदराबाद से हैं। वहीं अन्य बड़े शहरों में वाराणसी सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शहर रहा है। यहां कुल खर्च करने वालों में से 45 फीसदी सक्रिय खर्च करने वाले हैं। इसके बाद बेंगलुरु, चेन्नई, प्रयागराज आदि हैं।


क्या है ये योजना

इस योजना के अंतर्गत रेहड़ी पटरी लगाने वाले लोगों को बिना कुछ गिरवी रखे कर्ज उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना के अंतर्गत पहली बार अधिकतम 10,000 रुपये का लोन दिया जाता है। दूसरी बार 20,000 रुपये का अधिकतम लोन दिया जाता है और तीसरी बार 50,000 रुपये का अधिकतम लोन दिया जाता है।