28 March 2026

अजब: छुट्टी निरस्त होने के फर्जी शासनादेश पर दफ्तर पहुंचे अफसर


कानपुर,  । रामनवमी पर परिवार संग घूमने और धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लेने की सोच रहे अफसर तब चौंक गए जब सुबह से ही एक शासनादेश वायरल होने लगा। सामान्य प्रशासन अनुभाग के प्रमुख सचिव के हवाले से इस आदेश में लिखा था-‘सार्वजनिक अवकाश निरस्त किया जाता है’। तब किसी ने यह भी नहीं सोचा कि शासनादेश की तस्दीक कर ली जाए कि यह सही है या गलत। जलकल और नगर निगम के तमाम अफसर सीधे दफ्तर पहुंच गए। कुछ ही देर में कर्मचारी भी आ गए। दोपहर बाद दो बजे पता चला कि यह शासनादेश फर्जी है जिसे बनाकर वायरल किया गया है। अफसर तो दफ्तर में रुके रहे मगर कर्मचारी चले गए।



हकीकत यह है कि असली शासनादेश में जो पत्रांक था उसे फर्जी शासनादेश में नहीं बदला गया था। इस पत्रांक के बारे में अफसरों ने सोचा ही नहीं। जो अफसर लखनऊ चले गए थे वो भी आ गए। कुछ को सच्चाई का पहले ही पता चल गया तो बीच रास्ते से लौट गए। मगर उन्होंने यह बात किसी से साझा ही नहीं की। बेनाझाबर स्थित जलकल मुख्यालय में तो न सिर्फ महाप्रबंधक आनंद त्रिपाठी बल्कि अन्य अधिशासी अभियंता और अवर अभियंता तक बैठकर काम करते नजर आए। बाद में कुछ अफसरों को कर्मचारियों ने ही बताया-‘सर, पहले के शासनादेश और अभी के शासनादेश में पत्रांक तो वही है, ये नया आदेश नहीं बल्कि फेक है। बेमतलब आप भी आ गए और हमें भी बुला लिया’।


‘घोषित’ को बनाया था ‘निरस्त’:अफसरों ने शासनादेश को ठीक से पढ़ा तो सिर्फ कुछ शब्दों का ही फर्क नजर आया। असली आदेश के दूसरे बिंदु में लिखा था-‘राम नवमी के पावन अवसर पर 27 मार्च 2026 दिन शुक्रवार को भी नियोगिशियेबुल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है’ और फर्जी आदेश में अंकित था-‘सार्वजनिक अवकाश निरस्त किया जाता है’।


बस घोषित की जगह की जगह निरस्त बनाया गया था। ऐसा अनुमान है कि इसके लिए एआई का सहारा लिया गया होगा।

फेक शासनादेश की वजह से हम सभी जलकल दफ्तर आ गए थे। बाद में इसके फर्जी होने का पता चला। इसे अवकाश घोषित की जगह निरस्त बनाकर जारी किया गया था। वित्तीय सत्र का अंतिम सप्ताह चल रहा है तो दफ्तर में हमने पूरा काम निपटा लिया।

आनंद त्रिपाठी, महाप्रबंधक जलकल