हरदोई : परिषदीय प्राथमिक
विद्यालयों में कक्षा एक और दो के बच्चों के निपुण आकलन में हरदोई ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। है। कुल 2786 विद्यालयों में से 1002 विद्यालय निपुण घोषित किए गए। उपलब्धि के पीछे जिले में तैयार की गई रणनीति और शिक्षकों, एआरपी व एसआरजी की सक्रिय भागीदारी मुख्य कारण रही। निपुण एप से बच्चों का नियमित आकलन और शिक्षक प्रशिक्षण ने सफलता में अहम भूमिका निभाई प्रदेश में कक्षा एक और दो के बच्चों के निपुण आकलन में हरदोई ने शानदार प्रदर्शन किया है। जिले में कुल 2786 विद्यालयों में बच्चों का आकलन किया गया। 1002 विद्यालय निपुण घोषित हुए। जबकि प्रदेश में अन्य जिलों में आकलन अधिकतर विद्यालयों की संख्या के हिसाब से कम निपुणता दर्शाती है। उदाहरण के तौर पर, सीतापुर में 2910 विद्यालयों में केवल 446 निपुण घोषित हुए। बहराइच में 2414 में 307, जौनपुर में 2345 में 243, गोंडा में 2137 में 437, उन्नाव में 2201 में 375, आजमगढ़
में 2200 में 558, कुशीनगर में 2091 में 676 और प्रयागराज में 2409 में 808 विद्यालय ही निपुण घोषित हुए। हरदोई की सफलता के पीछे जिले में शुरुआत में बनाई गई रणनीति रही। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक निपुण एप पर प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में कक्षा एक व दो के 12-12 बच्चों का आकलन करते हैं। इसकी पहले से ही तैयारियां करा ली गईं थीं। बीएसए डा. अजित सिंह ने बताया कि सभी विद्यालयों में शिक्षकों को
नियमित अभ्यास कराया गया। एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन) एवं एसआरजी (राज्य रिसोर्स ग्रुप) को कार्य की जिम्मेदारी दी गई।
उन लोगों ने नियमित रूप से विद्यालयों में जाकर बच्चों का निपुण एप पर अभ्यास कराया, जिससे बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता, उत्तर देने की क्षमता और सीखने की आदतों में सुधार आया। परिणामस्वरूप बच्चे अधिक निपुण बने और विद्यालय निपुण घोषित होने की संख्या में रिकार्ड हासिल हुआ।

