आज माननीय #सुप्रीम_कोर्ट में #12460_शिक्षक_भर्ती प्रकरण पर लगभग 10 मिनट की सुनवाई हुई। सुनवाई भले ही समय की दृष्टि से संक्षिप्त रही, लेकिन विभिन्न पक्षों की ओर से रखी गई दलीलों ने यह अवश्य स्पष्ट कर दिया कि इस भर्ती में केवल फॉर्म भर देने को ही कुछ लोग नियुक्ति का अधिकार मानकर बैठे हैं।
ऐसा प्रतीत होता है मानो 12460 भर्ती में जिसने भी आवेदन किया था, उसने उसी दिन यह भीष्म प्रतिज्ञा कर ली थी कि अब नौकरी मिलना उसका जन्मसिद्ध अधिकार है। इसी मानसिकता के कारण आज न्यायालय के समक्ष अलग-अलग समूहों द्वारा अपनी-अपनी दावेदारी और मांगों का पूरा रायता फैलाया गया।
सुनवाई के दौरान मुख्य रूप से निम्न बातें सामने आईं.....
1. एक समूह की ओर से कहा गया कि विभाग द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जो याची सूची प्रस्तुत की गई है, उसमें केवल उन्हीं याचियों को स्थान दिया गया है जिनकी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। उनका कहना था कि इसी प्रकरण से संबंधित अनेक याचिकाएं हाईकोर्ट में भी लंबित हैं, लेकिन चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए हाईकोर्ट भी उन याचिकाओं पर प्रभावी सुनवाई नहीं कर रहा है। कुछ याचिकाएं हाईकोर्ट ने इस आधार पर निस्तारित भी कर दी हैं कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।
इसी आधार पर इस समूह ने मांग की कि हाईकोर्ट में याची रहे उनके लोगों को भी सुप्रीम कोर्ट में तैयार की जा रही याची सूची में शामिल किया जाए। इसी उद्देश्य से उन्होंने पूर्व आदेश में संशोधन हेतु मोडिफिकेशन एप्लीकेशन प्रस्तुत की।
2. शिक्षामित्रों एवं 51 अचयनित अभ्यर्थियों की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि जो सूची पूर्व में तैयार हो चुकी है, उसमें उनके सभी लोग कवर हो चुके हैं।उनका स्पष्ट आग्रह था कि माननीय सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश सही है, उसमें किसी प्रकार का संशोधन न किया जाए तथा शेष रिक्त पदों पर नियुक्ति का आदेश पारित किया जाए।
3. नियम 14(1)(a) को चुनौती देने वाले पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री गोपाल शंकर नारायण ने विस्तृत रूप से यह तर्क रखा कि पूरी भर्ती प्रक्रिया ही मूल रूप से दोषपूर्ण है और संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उनकी ओर से यह कहा गया कि इस भर्ती की मेरिट सूची पुनः राज्य स्तर पर तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने नियम की वैधानिकता को चुनौती देते हुए इस बिंदु पर विस्तृत सुनवाई की प्रार्थना की।
4. विभाग की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह निवेदन किया कि 12460 भर्ती में वर्तमान में 656 पद रिक्त हैं। विभाग ने कहा कि यदि न्यायालय अनुमति प्रदान करता है, तो इन रिक्त पदों पर मेरिट बनाकर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। अतः न्यायालय से शेष रिक्त पदों को भरने की अनुमति प्रदान करने का आग्रह किया गया।
🟣 अंततः माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आज के इस पूरे विवाद को फिलहाल शांत करते हुए तीन माह बाद याची सूची पुनः बनाकर दाखिल करने के लिए कहा है। व्यावहारिक रूप से अब सूची में शामिल होने की इच्छा रखने वाले सभी लोगों के लिए दरवाजे खोल दिए गए हैं।
🔶 जिस दिन माननीय सुप्रीम कोर्ट इन निरंतर बढ़ती दावेदारियों और गैरवाजिब मांगों से ऊपर उठकर मूल प्रश्न पर आएगा, उस दिन नियम 14(1)(a) की वैधता मेरिट पर परखी जाएगी। उसी दिन इस प्रकरण की वास्तविक दिशा और अंतिम परिणाम तय होंगे।
👉 तब तक 12460 भर्ती में कार्यरत अध्यापक इस पूरी न्यायिक पंचायत को शांति से किनारे बैठकर देख रहे हैं।
धन्यवाद।

