बांदा। जिन हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, उनमें फावड़ा थमाकर काम कराया जा रहा है, वह भी स्कूल के अंदर। इस बात की तस्दीक शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हुई। हालांकि आपका अपना अखबार हिन्दुस्तान वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। वीडियो कम्पोजिट विद्यालय अछरौंड़ के बताए जा रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि बच्चे स्कूल के अंदर लगे मौरंग के ढेर को मजदूर के साथ मिलकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में मदद कर रहे हैं। बच्चे पढ़ने के बजाय फावड़ा चला रहे हैं।
तसला लेकर मौरंग-बालू ढो रहे है। वीडियो वायरल होते ही अभिभावकों ने नाराजगी जताई। छात्र के पिता महेंद्र लोहिया ने वीडियो वायरल कर इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने बताया कि उनके दो बच्चे उक्त स्कूल में पढ़ते हैं। स्कूल में पढ़ाई के बजाय काम कराया जा रहा है। कहा कि मैंने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजा है, मजदूरी करने के लिए नहीं। छह से 12 साल के बच्चों के लिए बाल श्रम को अपराध घोषित किया है, लेकिन शिक्षा के मंदिर में ही गुरुओं द्वारा बच्चों को मजदूर बनाया जा रहा है। शिक्षक अपनी जेब भरने और मजदूरी का पैसा बचाने के चक्कर में मासूमों से पत्थर और बालू उठवा रहे हैं। उन्होंने जातिगत भेदभाव और छुआछूत करने का भी आरोप लगाया है। बताया कि मिड-डे मील के भोजन के समय बच्चों के साथ खराब बर्ताव किया जाता है। इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अव्यक्तराम तिवारी ने बताया कि शुक्रवार को सभी विद्यालय बंद थे। वायरल वीडियो अब तक उनके संज्ञान में नहीं आया है। अगर कोई वीडियो वायरल है तो उसकी जांच कराई जाएगी। सत्यता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

