बच्चों के भविष्य को शिक्षक ने दान कर दी पुश्तैनी जमीन

 
सौरिख,। शिक्षक ज्ञान का सागर है, जो छात्रों का निर्माण करता है। देश में तमाम शिक्षक ऐसे भी हैं, जिन्होंने छात्रों के भविष्य के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। ऐसे ही एक शिक्षक रामशरन शाक्य हैं जिन्होंने बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल और मैदान के लिए पुश्तैनी जमीन भी दान में दे दी। सकरावा थाना क्षेत्र के नगला अंगद गांव निवासी शिक्षक रामशरन शाक्य की जिंदगी आसान नहीं रही। छह साल की उम्र में ही अनाथ हो गए। गांव के लोगों की मदद से उन्हें प्राथमिक स्कूल में दाखिला मिलने पर मन लगाकर पढ़ाई की। उन्होंने बीएड की पढ़ाई पूरी की। 



एक निजी स्कूल में पढ़ाने लगे। वर्ष 2007 में गांव में एक प्राथमिक विद्यालय की मंजूरी मिली, तो उन्होंने स्कूल के लिए करीब दो बीघा पुश्तैनी जमीन स्कूल को दान कर दी और फिर वर्ष 2022 में खेल के मैदान के लिए दो बीघा और जमीन दान दे दी। वह बताते है कि हैं कि जब वह पढ़ते थे। गांव में स्कूल बनाने का मकसद था, कि बच्चों को स्कूल में पढ़ने के लिए गांव से बहुत दूर के लिए काफी दूर न जाना पड़े। क्योंकि कई बच्चों ने इसी वजह से स्कूल जाना छोड़ दिया था। उनकी कोशिश का नतीजा था कि कुछ दिनों में ही प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की संख्या 100 के पार हो गई। उन्होंने बताया कि इस स्कूल से पहले बच्चे 10 किलोमीटर दूर पढ़ने जाते थे। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग के लोग स्कूल के निर्माण के लिए जमीन की तलाश कर रहे थे। 2007 में गांव के लिए प्राथमिक विद्यालय की मंजूरी दे दी गई। जिसके बाद स्कूल और स्कूल तक जाने के लिए एप्रोच रोड के लिए जमीन दे दी। रामशरन जिस स्कूल में पढ़ाते थे, उस स्कूल में उन्होंने अपने गांव के करीब 72 छात्रों का दाखिला कराया।




स्कूल में वह नौ साल तक शिक्षक रहे। वर्ष 1991 में 180 रुपये वेतन मिलता था। मगर हमेशा यही प्रयास रहता था, कि गांव का कोई भी बालक शिक्षा से वंचित न रहे। साल 2018 में उनके गांव के स्कूल को अंग्रेजी मीडियम स्कूल में बदल दिया गया। इससे उनको बहुत खुशी हुई। वह आज भी इसका श्रेय ग्रामीणों को देते हैं। वर्ष 2007 और 2021 से 22 के बीच 1000 से अधिक बच्चे स्कूल से पास हुए हैं। वर्तमान में उनके स्कूल में 10 गांव के बच्चे पढ़ने आते हैं। जिनकी संख्या अब 300 से अधिक है। उनके पढ़ाए हुए गांव के बच्चे आज डॉक्टर, इंजीनियर और वकील भी हैं। शिक्षक रामशरन के प्रयास को देखते हुए तीन बार बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उन्हें सम्मानित किया। इसके बाद दो बार डीएम ने भी सम्मानित किया। उनके लगातार उल्लेखनीय कार्यों के चलते राज्य शिक्षक पुरस्कार 2023 के लिए मंगलवार को लखनऊ में सम्मानित किया जाएगा।