23 March 2026

यूपी-टीईटी में नॉर्मलाइजेशन का निर्णय, विवाद होना तय

 


प्रयागराज। पांच साल बाद होने जा रही उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग नॉर्मलाइजेशन (मानकीकरण) लागू कर सकता है। चयन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार यूपी-टीईटी 2026 में प्राप्त आवेदन पत्रों की संख्या अत्यधिक होती है और सभी अभ्यर्थियों की लिखित परीक्षा एक ही पाली और दिन में आयोजित किया जाना सुविधाजनक नहीं होता है तो लिखित परीक्षा एक से अधिक पालियों और दिनों में आयोजित की जा सकती है।



यदि परीक्षा एक से अधिक पालियों या दिनों में आयोजित की जाती है तो अभ्यर्थियों के तुलनात्मक मूल्यांकन के लिए स्कोर के नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया लागू होगी।


मानकीकरण में वही फॉर्मूला लागू होगा जो कर्मचारी चयन आयोग, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड आदि की ओर से लागू किया जाता है। ऐसा होने पर अंकों को लेकर विवाद होना तय है। जब परीक्षा कई शिफ्टों में होती है, तो हर शिफ्ट का पेपर समान कठिनाई का नहीं होता।


तमाम अभ्यर्थियों का मानना है कि कठिन शिफ्ट में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद नॉर्मलाइजेशन के बाद उनके अंक कम हो सकते हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने भी दो साल पहले पीसीएस और आरओ/एआरओ की प्रारंभिक परीक्षाओं में नॉर्मलाइजेशन (मानकीकरण) लागू करने की कोशिश की थी। लेकिन नवंबर के दूसरे सप्ताह में हजारों प्रतियोगी छात्र-छात्राओं के आंदोलन के बाद आयोग को अपना निर्णय वापस लेना पड़ गया था और दोनों ही प्रारंभिक परीक्षाएं एक दिन और एक पाली में करानी गई थी। आरओ/एआरओ 2023 में तो तकरीबन पौने 11 लाख अभ्यर्थियों की परीक्षा एक दिन में कराई गई थी। वो भी सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम 2024 के मानकों का पालन करते हुए।


पहली बार डिजिलॉकर पर मिलेगा प्रमाणपत्र


यूपी-टीईटी के प्रमाणपत्र परीक्षा परिणाम जारी किए जाने की तिथि से आजीवन मान्य होंगे। चयन आयोग ने यूपी-टीईटी का प्रमाणपत्र पहली बार इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (डिजिलॉकर) के माध्यम से देने का निर्णय लिया है। प्रमाणपत्र में अभ्यर्थी की फोटो, वर्ग (जाति) एवं विशेष आरक्षण श्रेणी में किसी भी प्रकार का परिवर्तन/संशोधन नहीं किया जाएगा। इसलिए आयोग ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि आवेदन करते समय विशेष सतर्कता बरतें।