16 June 2026

भीषण गर्मी के बीच स्कूल समय परिवर्तन की मांग तेज, शिक्षक संघ ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

 

भीषण गर्मी के बीच स्कूल समय परिवर्तन की मांग तेज, शिक्षक संघ ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

बस्ती, 16 जून 2026। प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी, उमस और लू को देखते हुए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने परिषदीय विद्यालयों के संचालन समय में बदलाव की मांग उठाई है। इस संबंध में संघ के जिला मंत्री बालकृष्ण ओझा ने जिलाधिकारी बस्ती को ज्ञापन सौंपकर विद्यालयों का समय प्रातः 7:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक निर्धारित करने का अनुरोध किया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि वर्तमान समय में अत्यधिक गर्मी और उमस के कारण छोटे बच्चों को सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक विद्यालय में पढ़ाई करना कठिन हो रहा है। दोपहर के समय तापमान और गर्म हवाओं का प्रभाव बढ़ जाने से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।

छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर चिंता

शिक्षक संघ ने अपने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि अधिकांश परिषदीय विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां कई बार बिजली आपूर्ति भी नियमित नहीं रहती। अनेक विद्यालय खुले मैदानों और खेतों के समीप होने के कारण गर्मी का प्रभाव और अधिक महसूस होता है। ऐसे में छोटे बच्चों को लंबे समय तक विद्यालय में रखना उचित नहीं माना जा सकता।

कई जिलों में बदला जा चुका है समय

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि प्रदेश के कुछ जिलों, जैसे वाराणसी, जौनपुर और बाराबंकी, में मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए विद्यालय समय में परिवर्तन किया जा चुका है। इसलिए बस्ती जनपद में भी बच्चों के हित में इसी प्रकार का निर्णय लिया जाना चाहिए।

7:30 से 12:00 बजे तक संचालन की मांग

शिक्षक संघ ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि भीषण गर्मी और उमस को देखते हुए परिषदीय विद्यालयों का संचालन सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक कराया जाए। संघ का कहना है कि इससे बच्चों को गर्मी से राहत मिलेगी और पठन-पाठन भी सुचारु रूप से संचालित हो सकेगा।

अभिभावकों में भी चिंता

गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच अभिभावक भी बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि छोटे बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विद्यालयों के समय में बदलाव किया जाना चाहिए।

शिक्षक संघ का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में विद्यालय समय परिवर्तन बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा—तीनों के हित में एक आवश्यक कदम होगा।