लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों के सामान्य वर्ग में समायोजन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजिव शुक्ला की पीठ ने मंगलवार को भावना यादव एवं अन्य की विशेष अपील स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया । मामला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी पदों की भर्ती से संबंधित है । आयोग ने 22 दिसंबर 2025 के विज्ञापन में व्यवस्था की थी कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी का सामान्य वर्ग में समायोजन केवल अंतिम चयन के समय किया जाएगा । इसके लिए शर्त रखी गई थी कि अभ्यर्थी ने स्क्रीनिंग परीक्षा के अर्हकारी मानक में छूट न ली हो ।
याचिकाकर्ताओं ने इस व्यवस्था और आयोग के नौ जनवरी 2020 के कार्यालय ज्ञापनों को चुनौती दी थी । कोर्ट ने कहा कि संबंधित भर्ती में स्क्रीनिंग परीक्षा केवल अभ्यर्थियों की छंटनी का चरण नहीं है । विज्ञापन के अनुसार स्क्रीनिंग परीक्षा के 75% व साक्षात्कार के 25% अंक जोड़कर अंतिम मेरिट तैयार की जानी है । इसलिए स्क्रीनिंग परीक्षा में प्राप्त अंक सीधे अंतिम चयन को प्रभावित करते हैं । सामान्य कटऑफ से अधिक अंक पाने वाले आरक्षित अभ्यर्थी का समायोजन उसी स्तर पर होना चाहिए । पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 की धारा 3(6) में ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है कि मेरिट के आधार पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी को सामान्य वर्ग में अंतिम चयन के समय ही समायोजित किया जाए ।

