डाकघर की छोटी बचत योजनाओं में पैसा लगाने वाले करोड़ों निवेशकों के लिए अहम खबर है। सरकार 30 सितंबर को अक्तूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा करेगी। इस बार महंगाई में बढ़ोतरी और सरकारी बॉन्ड की यील्ड में तेजी के कारण कुछ योजनाओं की ब्याज दर बढ़ने की संभावना पर चर्चा है।
दिसंबर 2024 के बाद नहीं बदली दरें : छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में दिसंबर 2024 के बाद कोई बदलाव नहीं हुआ है। जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में भी सरकार ने लगातार नौवीं तिमाही दरों को स्थिर रखा था। अभी पीपीएफ पर 7.1 फीसदी, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र पर 7.7 फीसदी और सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2 फीसदी ब्याज मिल रहा है। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना की दर भी 8.2 फीसदी है। इससे पहले जनवरी-मार्च 2024 में कुछ छोटी बचत योजनाओं की दरों में बदलाव हुआ था। दिसंबर 2024 में सुकन्या समृद्धि योजना और तीन साल की डाकघर सावधि जमा की दर बढ़ाई गई थी। इसके बाद से दरें स्थिर हैं।
अगर दर बढ़ी तो पुराने निवेशकों को भी फायदा: अगर सरकार अक्तूबर और दिसंबर तिमाही के लिए किसी छोटी बचत योजना की ब्याज दर बढ़ाती है तो उस योजना के नियमों के अनुसार नई दर का लाभ मिल सकता है। सार्वजनिक भविष्य निधि योजना के मामले में तिमाही के लिए घोषित ब्याज दर खाते में मौजूद पूरी राशि पर लागू होती है।
यानी केवल नई रकम जमा करने वालों को ही लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा खाते की शेष राशि भी नई दर के दायरे में आएगी।
महंगाई बढ़ी तो दर बढ़ाने का आधार मजबूत
महंगाई और सरकारी बॉन्ड की यील्ड महत्वपूर्ण संकेतक होते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उपभोक्ता महंगाई अप्रैल 2026 में 3.48 फीसदी थी, जो अगस्त में बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई। महंगाई में यह बढ़ोतरी छोटी बचत योजनाओं पर मिलने वाले वास्तविक रिटर्न को प्रभावित करती है। ऐसे में दरों में बढ़ोतरी की मांग का आधार बन सकता है। हालांकि, मौजूदा महंगाई अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक की छह फीसदी की ऊपरी सीमा से नीचे है। इसलिए केवल महंगाई के बढ़ने को दरों में बढ़ोतरी का पक्का संकेत नहीं माना जा सकता।
अभी किस योजना पर कितना ब्याज?
जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही की मौजूदा दरों के अनुसार डाकघर बचत खाते पर 4 फीसदी, एक साल की सावधि जमा पर 6.9 फीसदी, दो साल की जमा पर 7 फीसदी और तीन साल की जमा पर 7.1 फीसदी ब्याज है। पांच साल की सावधि जमा पर 7.5 फीसदी और पांच साल की आवर्ती जमा पर 6.7 फीसदी ब्याज मिलता है। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना और सुकन्या समृद्धि योजना 8.2 फीसदी की दर दे रही हैं।
नई दिल्ली, हिन्दुस्तान ब्यूरो। डाकघर की छोटी बचत योजनाओं में पैसा लगाने वाले करोड़ों निवेशकों के लिए अहम खबर है। सरकार 30 सितंबर को अक्तूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की समीक्षा करेगी। इस बार महंगाई में बढ़ोतरी और सरकारी बॉन्ड की यील्ड में तेजी के कारण कुछ योजनाओं की ब्याज दर बढ़ने की संभावना पर चर्चा है।
दिसंबर 2024 के बाद नहीं बदली दरें : छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में दिसंबर 2024 के बाद कोई बदलाव नहीं हुआ है। जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में भी सरकार ने लगातार नौवीं तिमाही दरों को स्थिर रखा था। अभी पीपीएफ पर 7.1 फीसदी, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र पर 7.7 फीसदी और सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2 फीसदी ब्याज मिल रहा है। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना की दर भी 8.2 फीसदी है। इससे पहले जनवरी-मार्च 2024 में कुछ छोटी बचत योजनाओं की दरों में बदलाव हुआ था। दिसंबर 2024 में सुकन्या समृद्धि योजना और तीन साल की डाकघर सावधि जमा की दर बढ़ाई गई थी। इसके बाद से दरें स्थिर हैं।
अगर दर बढ़ी तो पुराने निवेशकों को भी फायदा: अगर सरकार अक्तूबर और दिसंबर तिमाही के लिए किसी छोटी बचत योजना की ब्याज दर बढ़ाती है तो उस योजना के नियमों के अनुसार नई दर का लाभ मिल सकता है। सार्वजनिक भविष्य निधि योजना के मामले में तिमाही के लिए घोषित ब्याज दर खाते में मौजूद पूरी राशि पर लागू होती है।
यानी केवल नई रकम जमा करने वालों को ही लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा खाते की शेष राशि भी नई दर के दायरे में आएगी।
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