30 September 2026

शिक्षक भर्ती के संस्कृत विषय के विज्ञापन में अर्हता स्पष्ट नहीं

उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से प्रकाशित विज्ञापन संख्या 06/2026, दिनांक 15.09.2026 में संस्कृत विषय की अर्हता में मात्र "स्नातकोत्तर संस्कृत" का उल्लेख है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से आचार्य की डिग्री लेने वाले असमंजस में हैं। वजह यह कि "आचार्य (संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय)" का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

संस्कृत विषय की पारंपरिक एवं विशिष्ट उच्च शिक्षा व्यवस्था से आचार्य उपाधि प्राप्त अन्य अभ्यर्थियों के मध्य भी अर्हता को लेकर भ्रम है। पूर्व में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद/ बोर्ड तथा उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा चयन आयोग की ओर से समय-समय पर प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों में संस्कृत विषय के अध्यापन पदों के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता में "आचार्य (संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय)" स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाता रहा है।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखा है। कहा है, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से प्राप्त 'आचार्य' उपाधि संस्कृत विषय में उच्च स्तरीय विशिष्ट शैक्षिक योग्यता है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, भारतीय विश्वविद्यालय संघ और उत्तर प्रदेश शासन की ओर से तय समकक्षता संबंधी प्रावधानों के अनुरूप एमए (संस्कृत) के समकक्ष मान्य है। आयोग की ओर से प्रकाशित विज्ञापन में संस्कृत विषय की योग्यता में सिर्फ "स्नातकोत्तर संस्कृत" का उल्लेख है। आग्रह है कि संस्कृत विषय से संबंधित सभी विज्ञापनों में शैक्षिक योग्यता में स्पष्ट रूप से "आचार्य (संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय)" लिखा जाए। वर्तमान विज्ञापन में भी इस योग्यता को शामिल करते हुए शुद्धिपत्र जारी किया जाए।