05 October 2026

नई कंपनी में पेंशन अंशदान के लिए पुराना पीएफ रिकॉर्ड जरूरी

 

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) से जुड़े नियमों को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब सिर्फ मौजूदा वेतन देखकर यह तय नहीं होगा कि कर्मचारी ईपीएस का सदस्य बनेगा या नहीं। खासकर 25 हजार रुपये से ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों के मामले में उनका पिछला पीएफ और ईपीएस रिकॉर्ड भी जांचा जाएगा।



सरकार ने ईपीएफ में शामिल होने के लिए मूल वेतन की वैधानिक सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह की है। पुराने नियमों के तहत 15,000 से अधिक वेतन पर कार्यभार ग्रहण करने वाले कर्मचारी ईपीएफ का हिस्सा होते हुए भी ईपीएस के दायरे से बाहर रह जाते थे। संगठन ने इस विसंगति को दूर कर दिया है।


पहली नौकरी वालों के लिए नियम: अगर कोई व्यक्ति पहली बार नौकरी शुरू कर रहा है और उसका मूल वेतन 25,000 तक है, तो उसे ईपीएफ के साथ-साथ पेंशन योजना (ईपीएस) में भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। नियोक्ता को ईपीएफ और ईपीएस दोनों में निर्धारित योगदान करना होगा। नियोक्ता के कुल 12 प्रतिशत अंशदान में से 8.33 प्रतिशत हिस्सा ईपीएस फंड में जमा किया जाता है।


मौजूदा कर्मचारियों को बड़ा फायदा: इस बदलाव का सबसे अधिक लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा, जिनका वेतन पहले ₹15,000 से अधिक होने के कारण वे ईपीएस के दायरे से बाहर रह गए थे। अब यदि उनका वेतन ₹15,000 से ₹25,000 के बीच है, तो उन्हें स्वतः ईपीएफ, ईपीएस और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा (ईडीएलआई) योजना के दायरे में लाया जाएगा। इसके लिए कर्मचारियों को अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी नियोक्ता की होगी।


पिछली कंपनी का रिकॉर्ड इसलिए है जरूरी


नई व्यवस्था में कर्मचारी का पूर्व ईपीएफ व ईपीएस रिकॉर्ड बेहद अहम हो गया है। नौकरी बदलने की स्थिति में नए संस्थान को यह देखना होगा कि कर्मचारी पहले किस श्रेणी में था। यूएएन के जरिए यह डेटा आसानी से सत्यापित हो सकता है। इसी वजह से संगठन ने भर्ती के समय ही यूएएन और पिछली सदस्यता की जांच करने के निर्देश दिए हैं।


नौकरी बदलने वालों पर स्थिति


यदि पहले ईपीएस सदस्य नहीं थे...


यदि कर्मचारी का मूल वेतन 25,000 से अधिक है और वह पहले कभी ईपीएस का सदस्य नहीं रहा, तो उसके लिए नियोक्ता की ओर से स्वतः ईपीएस अंशदान नहीं काटा जाएगा। ऐसा कर्मचारी केवल ईपीएफ का सदस्य बना रहेगा लेकिन ईपीएस के अनिवार्य स्वतः नामांकन से बाहर रहेगा।


यदि कोई कर्मचारी पूर्व में ईपीएस का सदस्य रहा है और नई कंपनी में उसका मूल वेतन 25,000 से अधिक हो जाता है, तो केवल अधिक वेतन के आधार पर उसकी ईपीएस सदस्यता समाप्त नहीं होगी। वह जारी रहेगी। नए नियोक्ता को कर्मचारी के यूएएन और पिछले सेवा रिकॉर्ड का सत्यापन करना अनिवार्य होगा।