लखनऊ। ईओडब्ल्यू ने सपा शासनकाल में 1198 पदों पर पशुधन प्रसार अधिकारी की भर्ती में हुई धांधली में दस्तावेजी सुबूतों के साथ पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य भी जुटाए हैं। ओएमआर शीट के मूल्यांकन व मेरिट सूची तैयार करने में अनियमितताओं के आरोपों की फोरेंसिक जांच भी हुई थी। सूत्रों के अनुसार लखनऊ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला में ओएमआर शीट के कई नमूनों का परीक्षण कराया गया था, जिनमें कई स्याही का प्रयोग किए जाने की पुष्टि हुई थी। अपात्रों की भर्ती करने के लिए ओएमआरशीट में अलग-अलग पेन से खेल किया गया था। पशुपालन विभाग में 2014 में हुई भर्ती में धांधली के मामले में ईओडब्ल्यू ने बुधवार को लखनऊ के गोमतीनगर से तत्कालीन प्रमुख सचिव योगेश कुमार को गिरफ्तार किया गया था। मामले में ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन पशुपालन निदेशक रुद्र प्रताप, संयुक्त निदेशक पीके त्रिपाठी के अलावा मंडल स्तर पर तैनात रहे अपर निदेशकों की भूमिका को लेकर दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए हैं। इनमें तत्कालीन प्रमुख सचिव योगेश कुमार व तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह समेत 22 आरोपितों की भूमिका विवेचना के दौरान सामने आई थी।
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जांच एजेंसी ने कुल 28 आरोपितों के विरुद्ध 2022 में शासन से अभियोजन स्वीकृति मांगी थी। इनमें तत्कालीन मंत्री व नामजद आरोपी रायबरेली स्थित फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर मो. इसरत को छोड़कर शेष 26 आरोपितों के विरुद्ध अलग-अलग तिथियों में अभियोजन स्वीकृति हुई। इनमें 25 आरोपितों के विरुद्ध कोर्ट में आरोपपत्र भी दाखिल हो चुका है। मामले में पशुपालन विभाग के कई तत्कालीन अधिकारियों की मुश्किलें बढ़नी तय मानी जा रही हैं।
जांच एजेंसी ने भर्ती प्रक्रिया में उप्र पशुधन प्रसार व कुक्कुट विकास सेवा नियमावली-2002 तथा यथासंशोधित नियमावली-2013 के प्रावधानों को दरकिनार किए जाने के दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपित अधिकारियों के बयानों में भी गड़बड़ी के मौखिक साक्ष्य भी हैं। तत्कालीन प्रमुख सचिव व मंत्री ने नियमावली के विरुद्ध मंडल स्तर के बजाए सीधे मुख्यालय से भर्ती कराने का निर्णय किया था।
राजकिशोर सिंह ने थाम लिया था भाजपा का दामन
सपा सरकार में मंत्री रहे राजकिशोर सिंह बस्ती की हरैया सीट से तीन बार विधायक रहे हैं। उनका नाता सपा के अलावा बसपा व कांग्रेस से भी रहा है। राजकिशोर सिंह ने 2024 में सपा छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। इससे पहले वह मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रहे।
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