बेसिक शिक्षक और करोना संकट


"बेसिक शिक्षक और करोना संकट"

   मा0 योगी जी के सरकार में परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों की भौतिक परिवेश ( रंगाई पेंटिंग, खेलकूद सामग्री, युनिफोर्म, पुस्तकालय, चारदीवारी, गेट और फर्नीचर इत्यादि) में काफी बदलाव आया है। भौतिक परिवेश शिक्षा के अनुकूल हुई है। शैक्षिक गुणवत्ता बेहतर करने का भी प्रयास जारी है। शासन के इन सभी प्रयासों में हम सभी शिक्षक शासन के मंशा के अनुरूप कार्य कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। यदि किंचित कोई नहीं कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्यवाही स्वागत योग्य है। शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार आने पर हम सभी शिक्षकों के खोया हुआ सम्मान अवश्य वापस आएगा। 
    आगामी 1 जुलाई से विद्यालय खोलने और प्रधानाध्यापक/शिक्षक/शिक्षामित्र सभी को 8 से 1 बजे तक विद्यालय में उपस्थित रहने का आदेश हुए है। कुछ व्यावहारिक सुझाव इस प्रकार हैं।
(1) बदायूँ जनपद में लगभग 50% शिक्षक शिक्षिकाएं सुदूर जनपदों के मूल निवासी हैं। अधिकांश नोएडा गाजियबाद मेरठ सहारनपुर इत्यादि जिले से है जो 200 से 300 किमी दूर से आएंगे। कुछ हॉट स्पॉट एरिया से भी आएंगे। जब ये शिक्षक बदायूँ आएंगे तो क्या इन्हे बिना 14 दिन कवारांटइन के विद्यालय भेजना उचित होगा?
(2) बदायूँ जनपद के समस्त विद्यालय प्रवासी मजदूरों के लिए कवाराइंटीन सेंटर भी रहे हैं। क्या बिना सेनेटाईज कराए विद्यालय पर शिक्षकों का रहना उचित है? आज 26 जून है अभी तक एक भी विद्यालय सेनेटाईज नहीं हुए।
(3) यदि विद्यालय पहुंचकर बच्चों को पढ़ाना होता हमारे विद्यालय पर जाने से बच्चों का लाभ होता तो कितना भी जोखिम उठाकर बच्चों के हित में जाने से तनिक भी नहीं सोचते। पूर्व में हम सभी भूकंप के दिन, बाढ़ के दिनों में विषम परिस्थितियों में भी पहुंचकर बच्चों को पढ़ाने का काम किए हैं। करोना संकट में भी हम बच्चों को पढ़ाने को सहर्ष तैयार हैं। किन्तु हम कोरोना महामारी में जोखिम भी उठाए और बच्चों को कोई लाभ भी ना हो तो यह समझ में नहीं आ रहा है। 
(4) बेसिक शिक्षा विभाग में 50% से अधिक महिलायें कार्यरत हैं। हजारों की संख्या में ऐसी महिलाएं है जिनके 5वर्ष से कम आयु के बच्चे है साथ ही वो दूसरे जिले में कार्यरत हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार सुझाव दिए जा रहें है कि बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखना है। तो शिक्षकों को विद्यालय में उपस्थित होने के आदेश से ऐसी शिक्षिकाओं के बच्चे खतरे में पड़ जायेंगे। 
(5) विभागीय अभिलेखीय कार्य हम लॉक डॉउन में भी किए हैं और आगे भी हम बिना विद्यालय नियमित गए भी अभिलेखीय कार्य कर सकते हैं।
(6) बदायूँ के साथ साथ हमें लगता है यही समस्या समस्त जनपदों की होगी।
अतः शासन से मेरा करबद्ध प्रार्थना है कि इस मुद्दे का सकारात्मक हल निकाला जाय। अति कृपा होगी।
उपरोक्त सुझाओं के साथ साथ हम कोरॉना योद्धा के रूप में  शासन के आदेशों का अक्षरशः पालन सहर्ष करेंगे।

    राजपाल सिंह
जनपद - बदायूँ