19 July 2020

डॉक्यूमेंट अपलोड बनाम मास्साब


*डॉक्यूमेंट अपलोड बनाम मास्साब*

आजकल हमारे विभाग में ehrms पोर्टल पर डॉक्यूमेंट अपलोड का काम देख कर ऐसा लगता कि जैसे भेड़चाल और आफत का नया नाम है डॉक्यूमेंट अपलोड , कुछ मास्टर साब लोग ऐसे डॉक्यूमेंट अपलोड करने में लगे जैसे जितने डॉक्यूमेंट अपलोड करेंगे उतनी सैलरी बढ़ेगी गोया A लेवल, ओ लेवल ccc से लेकर tet , ctet , और तो और 6 माह के विशिष्ट बीटीसी को 2 वर्षीय बीटीसी बना कर अपलोड करने  में लगे हैं जबकि समकक्ष का कोई शब्द भी नहीं लिखा क्योकि अगर समकक्ष की ही बात होती तो डीएलएड का अलग से नाम क्यो होता खैर ऐसी ऐसी योग्यताएं जिनका ऑफलाइन सर्विस बुक में दूर दूर तक जिक्र नहीं सब अपलोड किए पड़े हैं , कुछ मास्साब लोग तो ऐसे ऐसे सवाल किए पड़े हैं कि आप का सिर ही चकरा जाएगा जैसे फ़ोटो लेना सही या स्कैन करवाना , ये नहीं हो रहा वो नहीं हो रहा आदि आदि , और जवाब देने वाला कौन कोई आधिकारिक चैनल नहीं सब अपने अपने हिसाब से ठेले पड़े हैं, लॉजिकल थिंकिंग और rational thinking की तो जैसे वाट ही लगी पड़ी सवाल ऐसे की प्राइमरी के बच्चे भी कभी शर्मा जाएं ।

 अब बात करे अधिकारियों की उनको भी पता है कि मास्टर लोग तो आदी है इस तरह से काम करने के खुद ही भेड़चाल से कोई न कोई व्यवस्था कायम ही कर लेंगे सो न तो कोई स्पष्ट आदेश और न कोई स्पष्ट निर्देश अब जैसे विशिष्ट बीटीसी की बात करें जब कॉलम आये तब अपलोड करिए जबरदस्ती क्यों अपलोड किए पड़े हैं लेकिन मास्साब भी कम नहीं है सोच रहे कहीं ऐसा न हो नौकरी में कुछ चूक हो जाये या वेतन कम हो जाये सो जैसे नागनाथ वैसे पूँछनाथ वाली कहावत चरितार्थ हो रही सब लगे पड़े हैं बस सवाल पे सवाल दागने में व्हाट्सएप्प पे अनगिनत सवाल लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं और तो और कोढ़ में खाज ये की आधे लोगों के मूल डॉक्यूमेंट कार्यालयों में जमा हैं और विभाग एक पन्ने का आदेश निकालकर चैन की नींद सो गया, कोई कुछ भी स्पष्ट बोलने की जहमत नहीं उठाना चाहता भले ही स्टेट का मास्टर रात दिन मरा जा रहा , जबकि सिर्फ एक आदेश से सब कुछ स्पष्ट करके तमाम भ्रम दूर भी किये जा सकते पर क्यों करे, रहने दो मास्टरों को बिजी वैसे भी क्या काम है इनके पास ।

अब बात करते संगठन की भैया उनको तो कुछ सुनाई दिखाई ही न देता काहे की एक कहावत जब रोम जल रहा था नीरो चैन की बंसी बजा रहा था ये जैसे संगठन के लिए ही बनी है ।

 हाल फिलहाल मास्टरों का हाल बस बेहाल ही नजर आता और कुछ सुधरता हुआ भी नहीं दिख रहा । राज्य सत्ता का एक काम अच्छे से हो रहा है और वो ये कि 5 लाख मास्टर आजकल बढ़िया से लगे पड़े हैं रात दिन डॉक्यूमेंट अपलोड के झमेले में ऐसे ही काम मे इतना बिजी रखेंगे की आपको फुरसत ही न मिलेगी वेतन पेंशन या अपने बारे में सोचने की ।

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