घोटाला मैनेज करने को अपना रहे हथकंडे, 9.73 करोड़ के घोटाले को लेकर बीईओ बना रहे शिक्षकों पर दबाव


उन्नावः कंपोजिट ग्रांट की लूट के लिए खंड शिक्षा अधिकारी तो जैसे तैयार ही बैठे थे। तत्कालीन डीएम व बीएसए का आदेश होते ही शिक्षकों को डराना शुरू कर दिया। जो आसानी से नहीं माने उनको डीएम के निर्देशों का पत्र दिखाकर चुप करा दिया गया। वे अब हर हथकंडे अपनाकर घोटाले को मैनेज करने में लगे हैं।


जिले में 9.73 करोड़ की कंपोजिट ग्रांट लूट में बीईओ ने अहम भूमिका निभाई, जिसके बाद बीईओ निशाने पर आने से पहले शिक्षकों पर दबाव बनवाकर बिल के साथ सामग्री को नियमों के अनुसार जुटाने में लग गए हैं। करोड़ों की लूट में तत्कालीन निलंबित डीएम व बीएसए के इशारे पर विद्यालयों से घटिया सामग्री के बदले चार से पांच गुना तक चेक राशि लेने वाले बीईओ अब भी बाज नहीं आ रहे हैं। खंड शिक्षा अधिकारी अध्यापकों पर दबाव बना रहे हैं कि वह लिखकर दें कि एजेंसी की वैन से उन लोगों ने स्वयं ही सामग्री खरीदी थी व इसके बदले भुगतान भी किया था। शिक्षक यह न बताएं कि बीईओ ने किसी प्रकार का प्रेशर दिया था। बेसिक शिक्षा परिषद के जूनियर व प्राइमरी शिक्षकों पर घोटाला मैनेज करने के लिए कहीं मान मनौव्वल तो कहीं सख्त कार्रवाई तो कहीं निलंबन तक की धमकी बीईओ दे रहे हैं। न हों गुमराह, हम बनेंगे सरकारी गवाह : उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राघवेंद्र सिंह, महामंत्री सौरभ सिंह, प्रांतीय कोषाध्यक्ष संजय कनौजिया, मंडल अध्यक्ष गजेंद्र सिंह सेंगर ने शिक्षकों से कहा है कि डरकर गुमराह न हों, कुछ लिखवाया जाए तो मत लिखे। राज्य परियोजना की रिपोर्ट में अध्यापक को दोषी नहीं माना गया है। मामले में किसी साथी को फंसाने के प्रयास हुए तो संगठन लड़ाई लड़ेगा। सरकारी गवाह बनने में भी संकोच नहीं किया जाएगा।