अभी बच्चे स्कूल खुलने का करें इंतजार, कैसे होगी पढ़ाई


कोरोना वायरस को लेकर अभी स्कूलों में बच्चों के बुलाने का इंतजार और बढ़ सकता है। महामारी के थमने का इंतजार में शैक्षिक सत्रशुरु होने के सात माह बाद भी बच्चे स्कूलों से दूर है। सबसे अधिक हर्जा ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले संसाधन विहीन बच्चों का हो रहा है । किताबी आंकड़ों में भले की गांवों का मौसम गुलाबी होने की तस्वीर पेश की जा रही हो, लेकिन दावें झूठे और मात्र किताबी ही साबित हो रहे है । खुद विभाग के आंकड़े ही खुलेआम दावों की पोल खोल रहे है।


बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी सरकारी स्कूलों में बच्चों तक ऑनलाइन कक्षाओं की पहुंच कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी है । सरकारी प्राइमरी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई की हालत धरातल पर शून्य है। जनपद में दो प्रतिशत बच्चों को भी ऑनलाइन शिक्षण मयस्सर नहीं है। स्कूली शिक्षा महानिदेशक ने दिए जनपदवार समीक्षा के बाद सुधार के निर्देश जारी किए थे । लाख प्रयासों के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों तक अपनी पहुंच नहीं बना पा रहा है। स्थिति यह है कि विभाग के दीक्षा एप से केवल 11 प्रतिशत बच्चे ही ऑनलाइन पढ़ाई कर पा रहे हैं वह भी शहरी क्षेत्र से सटे जनपदों में । इधर विभाग के ओर से बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुपों में हर दिन ई - पाठशाला व दीक्षा एप के जरिए बच्चों कोई रोचक वीडियोवई-कंटेंट उपलब्ध कराए जाने की सामग्री परोसी जा रही है। बीते 7 माह से बच्चे स्कूल के साथ शिक्षण से पूरी तरह दूर बने हुए है। अक्टूबर में विभाग ने दीक्षा एप से पढ़ाई का जो आंकड़ा पेश किया वह निराश करने वाला है। पूरे सूबे में अक्टूबर माह तक दीक्षा एप के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले बच्चों की संख्या केवल 11 प्रतिशत रही है। वही सूबे के कई जिले में कानपुर देहात जनपद में एक प्रतिशत भी बच्चों ने दीक्षाएप डाउनलोड नहीं किया। जबकि आधा दर्जन से अधिक ब्लॉकों का आंकड़ा कागजों में ही दौड़ रहा है । पूरे सूबे में सिर्फ लखनऊ ही सबसे आगे दिखा। जबकि ग्रामीण पृष्ठभूमि के देहात जनपद में यह और भी निराशाजनक तस्वीर पेश करता है।

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