ऑपरेशन शारदा में शिक्षकों की रुचि नहीं
स्कूल छोड़ने वाले मात्र 590 बच्चे चिह्नित
जागरण संवाददाता, प्रयागराज : ऑपरेशन शारदा के तहत जनपद में कुल 590 छात्र-छात्राओं को चिह्नित किया गया है जो स्कूल छोड़ चुके हैं। उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ा जा रहा है। इसमें 337 बालिकाएं और 253 बालक शामिल हैं। सबसे अधिक नगर क्षेत्र में शिक्षकों ने कार्य किया है। कुल 156 बालक बालिकाएं चिह्नित हुए हैं। इनमें बालक 100 और 56 बालिकाएं हैं। होलागढ़ विकासखंड में तीन, बहरिया में चार, कौंधियारा में पांच, सहसों में छह बालक-बालिकाएं चयनित हुए हैं। ये आंकड़े बताते हैं ऑपरेशन शारदा के तहत शिक्षकों ने खास प्रयास नहीं किए हैं।
बीएसए अनिल कुमार ने शारदा एप के आंकड़ों की समीक्षा की है। उसके अनुसार शैक्षिक सत्र 2026-27 में स्कूल चलो अभियान के तहत आउट आफ बच्चों के चिन्हांकन एवं नामांकन की स्थिति बहुत बेहतर नहीं दिख रही। सात विकासखंड में बच्चों की खोज दहाई के अंक को भी नहीं छू सकी। धनुपुर में कुल सात बच्चे, फूलपुर में आठ, शंकरगढ़ में नौ लोगों का चिह्नीकरण हुआ है।
करछना और भगवतपुर में 10-10, श्रृंगवेरपुर में 14, मऊआइमा में 16, जसरा में 17, उरुवा में 18, सैदाबाद में 19, कोरांव, चाका, मेजा में 20, प्रतापपुर में 26, सोरांव में 30, बहादुरपुर में 35 बच्चों को चयनित कर दोबारा स्कूल तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। कौड़िहार प्रथम में 39, मांडा में 44, हंडिया में 54 छात्र-छात्राएं जो पहले पढ़ाई छोड़ चुके थे अब फिर से स्कूल जाएंगे। बीएसए के अनुसार यह अभियान जारी रहेगा।
पुराविशेषों के सूक्ष्म अध्ययन के तकनीकी पक्ष को विद्यार्थियों ने जाना
प्रयागराज : इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की ओर से पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय पुरातत्व संस्थान के अधीक्षक डा. गौतमी भट्टाचार्य, डा. आशीष रंजन साहू के साथ परास्नातक डिप्लोमा पाठ्यक्रम के विद्यार्थी शामिल हुए। इसमें प्रो. प्रकाश सिन्हा ने छात्रों को टूल टाइपालाजी और टेक्नोलाजी, उपकरण निर्माण प्रक्रिया तथा होमिनिड्स के जीवित रहने के परिवेश एवं सांस्कृतिक सामग्री के संदर्भ से परिचित कराया। डा. शैलेश कुमार यादव व डा. अमित सिंह ने कुछ व्यावहारिक बिंदुओं पर विचार रखे। डा. अमित सिंह ने माइक्रो वियर स्टडीज के जरिए पुराविशेषों के सूक्ष्म अध्ययन पर प्रकाश डाला। पुरा वनस्पतिशास्त्री डा. तूलिका ने वनस्पतियों और पुरातात्विक उत्खनन के समय संग्रहित की गई मिट्टी आदि की जानकारी दी। अंतिम सत्र में छात्रों ने जीआर शर्मा मेमोरियल म्यूजियम का भ्रमण किया।

