06 May 2020

बच्चों को ऑनलाइन कक्षा के दौरान साइबर बुलिंग से बचाएं, अन्यथा कार्रवाई के लिए रहे तैयार: KVS


लॉक डाउन के चलते देशभर के स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेस शुरू की गई है, छात्र-छात्राओं के लिए 'साइबर बुलिंग' की समस्या एक मुख्य मुद्दा बन गई है. छात्र-छात्राओं पर 'साइबर बुलिंग' का खतरा बढ़ने लगा है, 'साइबर बुलिंग' का मतलब होता है गंदी भाषा का प्रयोग

इसलिए  राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के दिशा निर्देशों के बाद केंद्रीय विद्यालय संगठन ने अपने सभी स्कूलों को इस मामले में सतर्कता बरतने की राय दी है


KVS ने स्पष्ट कर दिया है, ऑनलाइन कक्षा में विद्यार्थियों की संपूर्ण सुरक्षा की जिम्मेदारी विद्यालय प्रशासन की होगी

WHAT IS CYBERBULLYING? 

'साइबर बुलिंग' का अर्थ होता है-  
इंटरनेट पर गंदी भाषा, गंदा कमेंट आदि का प्रयोग,
तस्वीरों या धमकियों के माध्यम से इंटरनेट पर तंग करना

CYBERBULLYING की कोई भी घटना मिलती है तो जुवेनाइल एक्ट -2015 के सेक्शन (75) के तहत कार्रवाई किये जाने का प्रावधान है.  इसलिए कार्रवाई से बचने के लिए KVS ने सभी को दिशा निर्देश देकर उन्हें सख्ती से पालन करने को कहा है।

What is Juvenile Justice Act?

इस नए विधेयक के अनुसार 16 वर्ष से अधिक उम्र के अपराधी किशोर-किशोरियों को व्यस्क मानने का प्रावधान है। इस विधेयक में दिए गए प्रावधानों के अनुसार, जघन्य अपराधों में लिप्त पाए गए किशोर-किशोरियों  को अपराधी मानते हुए जेल की सजा दी सकती है। लेकिन यह राहत है कि इस अपराध में  उम्र कैद या फांसी की सजा नहीं है.


KVS ने इस समस्या से निपटने के लिए दिए यह निर्देश
  • विद्यार्थियों को सिखाएं कि किस एप्लीकेशन इस्तेमाल करते समय क्या करना है, और क्या नहीं
  • विद्यार्थियों की वर्चुअल कक्षाएं या ऑनलाइन कक्षाएं अभिभावकों की देखरेख में कराई जाएं 
  • विद्यार्थियों के नाम से लॉगिन आईडी बिल्कुल ही न बनाएं
  • अध्यापक इस बात का बहुत ही ध्यान रखें कि विद्यार्थियों गेस्ट के तौर पर लॉगिन करें, पूरा नियंत्रण शिक्षक के हाथ में 

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