उ०प्र० जहां सरकारी शिक्षक विवाह करने के लिए बीमार होना पड़ता हैं! 🤔मानो या ना मानो


👉 *उ०प्र०जहां सरकारी शिक्षक विवाह करने के लिए बीमार होना पड़ता हैं!* 🧐
✍️एक स्वतंत्र लेख द्वारा
रजनीश कुमार गुप्ता 🙏

यूपी के बेसिक और माध्यमिक टीचर इस पशोपेश में हैं कि शादी के लिए किया क्या जाए? बीमार पड़ जाया जाए?



एक टीचर की कहानी से पूरी बातचीत शुरू कर रहे हैं. कहानी सच्ची है और है यूपी के बहराइच जिले के एक ब्लॉक स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका की. उनका असल नाम तो आपको नहीं बतायेंगे, लेकिन आपको मामला समझाने में आसानी हो इसलिए इन शिक्षिका का नाम कोमल रख लेते हैं. कोमल की शादी हुई थी 2018 में. शादी के लिए नीलम को कुछ दिनों की छुट्टी चाहिए थी. छुट्टी नहीं मिल रही थी. नीलम ने एक काम किया. वो बताती हैं,


“हमको छुट्टी चाहिए थी शादी के लिए, तो मिल नहीं रही थी. तो हमको एक काम करना पड़ा. हम गए एक डॉक्टर के पास. कहे कि मेरा तबियत ख़राब है. हमको कुछ दिन का बेड रेस्ट लिख दीजिए. डॉक्टर ने अपने पर्चे पर दवा के साथ-साथ बेडरेस्ट की सलाह भी लिख दी. फिर मैंने खंड शिक्षा अधिकारी को लेटर लिखा कि तबियत ख़राब है. तबियत ठीक होने तक के लिए मुझे मेडिकल अवकाश चाहिए. चूंकि डॉक्टर का पर्चा साथ में लगा था, इसलिए मुझे छुट्टी मिल गयी. उसी छुट्टी में मेरी शादी हुई.”

यूपी में ये कहानी आम है. यूपी की ये कहानियां ऐसी हैं कि प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में काम करने वाले सरकारी टीचरों को जब शादी करनी होती है, तब उनके पास छुट्टियां नहीं होती हैं.
गोरखपुर के एक माध्यमिक विद्यालय में काम करने वाले शिक्षक अशोक (बदला हुआ नाम) भी कुछ ऐसा ही करते हैं. अशोक की शादी थी 2018 में. शादी के लिए छुट्टी का पता किया, तो सहकर्मियों ने बताया कि घी सीधी उंगली से नहीं निकलता. अशोक ने कहा,

“मुझे शादी के लिए कम से कम 20 दिन की छुट्टी चाहिए थी. 20 दिन की इसलिए क्योंकि मैं इस जनपद का रहने वाला हूं नहीं. अपने घर बरेली तक जाने में ही आधा दिन लग जाता है. आने-जाने का समय निकल दीजिए तो ख़रीददारी, तैयारी और बाक़ी कामों के लिए तमाम काम करने थे. तो हफ़्ते-दस दिन में काम पूरा ना हो पाता. इसलिए मैंने सीधे मेडिकल लीव के लिए अप्लाई कर दिया.”

यानी बात साफ़. यूपी के माध्यमिक और सरकारी टीचर अब शादी करने के लिए मेडिकल लीव का सहारा ले रहे हैं.

लेकिन यूपी के टीचर क्यों ऐसा काम कर रहे हैं?

कारण है स्पेशल लीव का अभाव. लोग बताते हैं कि टीचरों को एक साल के भीतर 14 कैज़ूअल लीव (CL) यानी आकस्मिक छुट्टियां मिलती हैं. इसके अलावा उन्हें अपनी पूरी सर्विस के दौरान एक साल तक की मेडिकल लीव यानी चिकित्सकीय अवकाश मिलता है. गोरखपुर जिले के ही दूसरे टीचर बताते हैं कि छुट्टियों का अभाव ही है, कि टीचरों को ऐसे क़दम उठाने पड़ रहे हैं. एक टीचर कहते हैं कि साल में CL तो पता नहीं कब लेनी पड़ जाए, इसलिए हमारी मजबूरी है कि उन्हें बचाकर रखा जाए. और मेडिकल लीव से काम चलाया जाए.

तो क्या किया जाता है?

शादी की डेट तय होती है. इसके बाद जैसा टीचर बताते हैं कि डॉक्टर से मिला जाता है. डॉक्टर के सामने एक झूठ बीमारी बतायी जाती है और कहा जाता है कि बेड रेस्ट दरकार है. डॉक्टर का पर्चा लेकर खंड शिक्षा अधिकारी या ज़िला बेसिक या माध्यमिक शिक्षा अधिकारी को लेटर लिखा जाता है. चूंकि मेडिकल लीव में ये बताने की ज़रूरत नहीं होती कि कितने दिनों का अवकाश चाहिए, लिहाज़ा बस ये कहा जाता है कि फ़लां तारीख़ से स्वस्थ होने तक का अवकाश चाहता या चाहती हूं. छुट्टी अमूमन मिल ही जाती है. और चूंकि एक बार में मेडिकल लीव कितने भी दिन की ली जा सकती है (एक साल से कम) तो टीचर CL बचाकर मेडिकल लीव भजा लेते हैं.

तो क्या शिक्षकों को शादी करने के लिए छुट्टी चाहिए?

शायद मुद्दे का यूं सरलीकरण करना जल्दबाज़ी होगी. मामले को थोड़ा समझने के लिए हमने शिक्षक संघ से जुड़े लोगों से बात की. उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के बहराइच जनपद के कोषाध्यक्ष आनंद मोहन मिश्र ने बताया,

“टीचर शादी-ब्याह करने के लिए यदि छुट्टी ले रहे होंगे तो मुझे इसकी जानकारी नहीं है. लेकिन ये ज़रूर है कि यूपी में टीचरों के पास छुट्टियों का अभाव है. हमारे पास साल भर में 14 CL है. पूरी सर्विस में एक साल का मेडिकल अवकाश. इसके अलावा हम गर्मी की छुट्टियों में भी विद्यालय आते हैं. हमें उसका अतिरिक्त मानदेय या अतिरिक्त अवकाश तो मिलता नहीं. मंत्रियों और सचिवों को इस संबंध में ज्ञापन दिए जा चुके हैं. आश्वासन के अलावा अभी तक कुछ नहीं मिला है.”

यानी छुट्टी कम होने की समस्या है. कई सारे टीचर ये भी बताते हैं कि छुट्टी कम होने से उनका सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है. लेकिन दूसरा पक्ष सुनना ज़रूरी है. हमने बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी से बात की. हमसे बातचीत में शिक्षा मंत्री ने कहा,

“टीचर हमें ये बताएं कि देश का कौन-सा दूसरा राज्य टीचरों को साल भर में 14 CL देता है. कोई नहीं. और ये लीव चाहना क्या होता होता है? चाहने को तो हम चांद पर भी जाना चाहते हैं. लेकिन चाहकर चले जायेंगे क्या? क्यों चाहिए इनको लीव? ये सरकारी टीचर हैं और सारी सुविधाएं राज्य कर्मचारियों वाली चाहते हैं. ऐसा कैसे होगा?”

यानी राज्य मंत्री अपनी बात कर रहे हैं. शिक्षक अपनी. और कहीं शायद कोई एक और टीचर होगा, जो इस जुगत में होगा कि शादी कैसे निबटाई जाए। वैसे अन्यथा ना लें आदरणीय मंत्री जी को चाहिए कुछ नहीं! पर लेंगे सब कुछ.......💯🤔
मानो या ना मानो

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