बहराइच : ग्राम पंचायतों में तैनात सफाईकर्मियों व सामुदायिक शौचालयों के केयर टेकर की हाजिरी आनलाइन लगाने की व्यवस्था की गई थी। पंचायती राज विभाग के पोर्टल पर ब्लाकवार इन कर्मचारियों की फीडिंग कराई गई थी, लेकिन आदेश के दो साल बाद भी यह व्यवस्था लागू नहीं हुई। निदेशालय स्तर तक सफाई कर्मचारी संघ ने विरोध जताया था व अन्य आलम यह है कि सफाईकर्मी गांव जाते नहीं, कोई ब्लाक में बाबू बना बैठा है और कोई साहब की गाड़ी चला रहा है। सामुदायिक शौचालयों पर एक-एक केयर टेकर की तैनाती है। करीब दो साल पहले पंचायती राज निदेशक के आदेश पर सभी सफाईकर्मियों के साथ केयर टेकर की हाजिरी आनलाइन लगाने की व्यवस्था की गई थी। पोर्टल पर इनकी ब्लाकवार व ग्राम पंचायतवार फीडिंग हुई थी। उधर इसे लेकर ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ ने निदेशालय स्तर तक प्रदर्शन किया था। नतीजा यह निकला कि आज तक यह व्यवस्था लागू नहीं हो पाई। ऐसे में
बिना मूल काम किए निकाल रहे वेतन अपना मूल काम छोड़कर कई सफाईकर्मियों का वेतन बड़े आराम से निकल रहा है। डीपीआरओ कार्यालय हो या फिर ब्लाक कार्यालय यहां तक की निदेशालय तक में लगी सफाई कर्मियों को वेतन कागज़ पर उनके तैनाती वाले ग्राम पंचायत से निकल रहा है। जिले में 73 सफाईकर्मी ऐसे हैं जो दूसरा जिला, ब्लाक के साथ अन्य स्थानों पर नौकरी कर रहे हैं। अधिकारियों को भी इस गड़बड़ी की जानकारी है। इसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जो गांवों में सफाई पर भारी पड़ रही है।
सफाईकर्मियों मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं। गांवों में गंदगी प्रतिदिन की इनकी उपस्थिति का साक्षात प्रमाण है। एडीओ पंचायत, सचिव एवं प्रधानों को भी इसमें लाभ मिल रहा है। तभी तो सफाई कर्मियों का वेतन आसानी से निकल रहा है। - चंद्रभान सिंह, डीबीआरसी

