लखनऊ। पंचायत चुनाव में फर्जी मतदान पर रोक लगाने के लिए अब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। चेहरा पहचान प्रणाली (फेशियल रिकग्निशन सिस्टम) के जरिए फर्जी वोटरों की पहचान की जाएगी, जिससे चुनाव प्रक्रिया को और पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सके।
राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने जानकारी दी कि शाहजहांपुर के कटरा और कुशीनगर के फाजिलनगर में नगर पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव के दौरान इस तकनीक का सफल परीक्षण किया गया। इस प्रयोग में कुल 50,257 मतदाताओं पर यह प्रणाली लागू की गई, जो देश में पहली बार किसी चुनाव में इस तरह का प्रयोग माना जा रहा है।
🔹 कैसे काम करेगी यह तकनीक
यदि कोई मतदाता एक मतदान केंद्र पर वोट डालने के बाद दूसरे केंद्र पर दोबारा वोट डालने की कोशिश करता है, तो चेहरा पहचान प्रणाली उसे तुरंत पहचानकर पकड़ लेगी। इससे डुप्लीकेट वोटिंग पर प्रभावी रोक लगेगी।
मतदान केंद्रों पर तैनात अधिकारियों के मोबाइल में एफआरएस (Facial Recognition System) एप्लिकेशन इंस्टॉल किया गया है। मतदान शुरू होने से लेकर खत्म होने तक केवल यही एप्लिकेशन मोबाइल पर सक्रिय रहेगा, जिससे निगरानी लगातार बनी रहेगी।
इस नई तकनीक के उपयोग से चुनावों में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी वोटिंग पर कड़ा नियंत्रण संभव होगा। आने वाले समय में इसे बड़े स्तर पर लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

