प्रयागराज, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में आयोजित पीसीएस-2024 साक्षात्कार के दूसरे दिन मंगलवार को बोर्ड में अभ्यर्थियों से ऐसे प्रश्न पूछे गए, जिनमें समाज, तकनीक, नैतिकता और प्रशासन चारों का समन्वय दिखा।
शाम के सत्र में एक चर्चित सामाजिक मुद्दे पर प्रश्न पूछा गया कि महिलाओं द्वारा पति की हत्या के बढ़ते मामलों, विशेषकर ब्लू डूम' जैसी घटना को आप कैसे देखते हैं? अभ्यर्थियों से अपेक्षा की गई कि वे इसे सनसनीखेज अपराध नहीं, बल्कि पारिवारिक संवादहीनता, मानसिक स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और सामाजिक मूल्यों के क्षरण के संदर्भमें संतुलित दृष्टि से देखें।
विवाह संस्था से युवाओं के घटते विश्वास और धार्मिक प्रतीकों भगवा व हरे रंग को लेकर होने वाले टकराव पर भी विचार मांगे गए। ओटीपी स्कैम को केंद्र में रखकर जाना गया कि कैसे डिजिटल जागरूकता और साइबर सुरक्षा प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी बन चुकी है। यह भी पूछा गया कि डेटा एनालिसिस क्या है, इसके टूल्स कौन-कौन से हैं और डेटा एनालिसिस व एआइ एनालिसिस में क्या अंतर है? दिल्ली में आयोजित
एआइ समिट पर भी प्रश्न पूछे गए। एआइ का उपयोग, उसके संभावित नुकसान और शासन में उसकी भूमिका पर प्रश्न आए। अभ्यर्थियों से पूछा गया कि क्या एआइ पारदर्शिता और दक्षता बढ़ा सकता है? क्या इससे रोजगार पर प्रभाव पड़ेगा? एआइ पर आधारित प्रश्नों की संख्या अधिक होना यह स्पष्ट
संकेत था कि प्रशासनिक सेवाओं में तकनीकी समझ अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता बन रही है। इसके अलावा खनन पर भी प्रश्न आए, जिसमें एसडीएम बनने पर खनन क्षेत्र में अवैध माइनिंग रोकने, नदी किनारे सैंड माइनिंग पर प्रतिबंध लागू करने के लिए क्या करेंगे? साथ ही सीमित संसाधनों में काम
करने, एमपी-एमएलए के दबाव की संभालने जैसे प्रश्नों ने व्यावहारिक प्रशासनिक कौशल की परीक्षा ली। बाल श्रम, नेत्रहीन मां के संदर्भ में मानवीय निर्णय तथा घरेलू सहायक द्वारा पैसे लेने की स्थिति में कार्रवाई जैसे प्रश्नों से संवेदनशीलता और कानून सम्मत व्यवहार को परखा गया।

