📰 TET अनिवार्यता पर विवाद: सुप्रीम कोर्ट के 2024 फैसले के विपरीत आदेश पर उठे सवाल
📍 नई दिल्ली / उत्तर प्रदेश
सरकारी नौकरियों में भर्ती नियमों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। 10 सितंबर 2025 को जारी TET अनिवार्यता आदेश को लेकर शिक्षकों और संगठनों ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के पहले से दिए गए फैसले के खिलाफ है।
⚖️ क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
7 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संविधान पीठ, जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने की, ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया था:
👉 भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसके नियम (Rules of the Game) बदले नहीं जा सकते
👉 चयन प्रक्रिया के बीच योग्यता (Eligibility) में बदलाव अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है
👉 पारदर्शिता और समानता भर्ती प्रक्रिया की आधारशिला होनी चाहिए
❗ TET आदेश पर क्यों उठ रहे सवाल?
शिक्षक संगठनों का आरोप है कि:
- 10 सितंबर 2025 का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत है
- यह आदेश 25–30 वर्ष पहले नियुक्त शिक्षकों की योग्यता पर सवाल उठाता है
- इससे पहले से चयनित शिक्षकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं
- इसे “प्राकृतिक न्याय” के खिलाफ बताया जा रहा है
🧑⚖️ मामला अब सुप्रीम कोर्ट में
इस मुद्दे पर विभिन्न संगठनों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिकाएं (Review Petitions) दाखिल की गई हैं।
शिक्षकों की ओर से देश के वरिष्ठ अधिवक्ता:
- अभिषेक मनु सिंघवी
- मुकुल रोहतगी (पूर्व अटॉर्नी जनरल)
अपना पक्ष रखेंगे।
🗣️ शिक्षक संगठनों का दावा
संगठनों का कहना है कि:
👉 न्यायालय में तथ्यात्मक और मजबूत तर्क प्रस्तुत किए जाएंगे
👉 सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले के आधार पर शिक्षकों को राहत मिलने की पूरी उम्मीद है
👉 यह मामला लाखों शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा है
⏳ धैर्य रखने की अपील
शिक्षक संगठनों ने अपने साथियों से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखें। उनका कहना है कि थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन अंततः न्याय मिलने की संभावना मजबूत है।
TET अनिवार्यता को लेकर विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि भर्ती प्रक्रिया के नियम बीच में नहीं बदले जा सकते, वहीं दूसरी ओर नए आदेश से पुराने चयन पर असर पड़ने का सवाल खड़ा हो गया है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

