आयकर विभाग पुरानी आयकर कर व्यवस्था के तहत भरे जाने वाले रिटर्न और उनसे जुड़े कर दावों की गहनता से जांच कर रहा है। इसके लिए कई स्तर पर बदलाव किए गए हैं। इसमें सबसे अहम कर कटौती के दावों की रियल टाइम निगरानी की जा रही है। ऐसे में अगर पुरानी आयकर व्यवस्था के तहत रिटर्न भर रहे हैं तो दस्तावेजों की अच्छे से जांच करें और कोई गलत जानकारी न दें।
सूत्रों का कहना है कि इसके लिए आंतरिक प्रणाली में कई बदलाव किए गए है, जिसके बाद रिटर्न भरते वक्त किए जाने वाले दावों से जुड़े दस्तावेजों की निगरानी बढ़ गई है। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति स्वास्थ्य बीमा, पीपीएफ, ईपीएस, एनपीएस और मकान के किराए की रसीद लगाकर छूट पाने का दावा करता है तो उसका तत्काल मिलान किया जा रहा है। पहले आयकर रिटर्न प्रक्रिया पूरी होने के बाद डाटा मिलान किया जाता था। लेकिन अब जैसे ही संबंधित दस्तावेज आयकर पोर्टल पर अपलोड होते हैं तो तत्काल मिलान प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। इसके बाद संबंधित व्यक्ति को सुधार के लिए सूचित किया जाता है। अगर सुधार नहीं किया जाता है तो विभाग नोटिस भेजकर जुर्माना लगाता है।
विभाग का कहना है कि नई प्रणाली में अहम बदलाव नियोक्ताओं की जिम्मेदारी को लेकर किया गया है। हर कंपनी और नियोक्ता का ऑडिट होता है। इसलिए हर नियोक्ता के लिए अनिवार्य किया गया है कि वह आंतरिक ऑडिट के दौरान कर्मचारी के कर कटौती से जुड़े दावों की गहनता से जांच करें। साथ ही उसका पूरा रिकॉर्ड अपने पास व्यवस्थित तरीके से रखे। दरअसल, ऑडिट ट्रेल किसी संस्थान से जुड़े सिस्टम व व्यक्तियों के वित्तीय लेनदेन और गतिविधियों का एक व्यवस्थित, कालानुक्रमिक रिकॉर्ड है। यह रिकॉर्ड बताता है कि किसने, कब और क्या बदलाव (एंट्री, संशोधन, या डिलीट) किया। यह धोखाधड़ी रोकने, पारदर्शिता बढ़ाने और नियमों के पालन के लिए जरूरी होता है।
इसलिए पड़ी जरूरत
पुरानी आयकर व्यवस्था के तहत भेजे जाने वाले रिटर्न में छूट पाने के लिए कुछ दस्तावेज फर्जी तरीके से लगाए जाते थे। जैसे राजनीतिक दलों को चंदा देने की रसीद लगाई जाती है लेकिन उसमें काफी सारे मामले पकड़े गए कि जिस पार्टी के नाम की रसीद लगाई गई, उसके खाते में धनराशि गई ही नहीं। घर किराए पर लेने की रसीद लगाई लेकिन मकान मालिक को राशि गई ही नहीं। इसलिए डटा मिलान की प्रक्रिया एडवांस कर दी है। अब जिसके घर किराए पर रहते हैं, उसका पैन नंबर देना भी अनिवार्य है।

