अगर आपने एक ही वित्त वर्ष में नौकरी बदली है, तो अब टैक्स से जुड़ा एक नया नियम आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। आयकर विभाग ने वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए नया ‘फॉर्म 122’ शुरू किया है, जिसका उद्देश्य नौकरी बदलने के दौरान होने वाली टैक्स गड़बड़ियों को कम करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फॉर्म नहीं भरने पर कर्मचारी के वेतन से जरूरत से ज्यादा टैक्स कट सकता है और बाद में रिफंड पाने के लिए महीनों इंतजार करना पड़ सकता है। इसलिए नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों के लिए यह नया फॉर्म बेहद अहम माना जा रहा है।
किन बातों का रखें ध्यान
● पुरानी कंपनी का फॉर्म-16 संभालकर रखें , पुरानी आय और टैक्स की सही जानकारी दें, अन्य आय छिपाएं नहीं, नया फॉर्म समय पर जमा करें
क्यों पड़ी इसकी जरूरत
अब तक नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों को पुराने नियोक्ता से मिली आय और वहां कटे टैक्स की जानकारी नए नियोक्ता को अलग-अलग फॉर्म के जरिए देनी पड़ती थी। इसमें मुख्य रूप से फॉर्म 12बी और फॉर्म 12बीएए का इस्तेमाल होता था। लेकिन कई कर्मचारी जानकारी समय पर नहीं दे पाते या नई कंपनी तक पूरी जानकारी पहुंचती नहीं थी। इसके चलते नया नियोक्ता कर्मचारी की पूरी आय को नई आय मानकर टैक्स काटना शुरू कर देता था।
क्या है नया फॉर्म 122
यह फॉर्म एक संयुक्त घोषणा पत्र है। इसके जरिए कर्मचारी को अपनी पुरानी नौकरी से मिली आय, वहां कटे टैक्स, मकान से होने वाले नुकसान, बैंक ब्याज जैसी अन्य आय और पहले से कटे टीडीएस या टीसीएस की जानकारी देनी होती है। इस जानकारी के आधार पर नया नियोक्ता सही कर देनदारी तय करता है और उसी अनुसार स्रोत पर कर कटौती करता है।
इसलिए भरना जरूरी
यह फॉर्म कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, लेकिन कर विशेषज्ञ इसे बेहद जरूरी मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कर्मचारी यह फॉर्म जमा नहीं करता, तो नया नियोक्ता केवल वर्तमान वेतन के आधार पर टैक्स काटेगा। ऐसी स्थिति में कर्मचारी के वेतन से जरूरत से ज्यादा टैक्स कट सकता है। बाद में आयकर रिटर्न भरते समय उसे रिफंड के लिए दावा करना पड़ेगा और रिफंड आने में कई महीने लग सकते हैं। इतना ही नहीं, यदि कर्मचारी का कुल बकाया टैक्स 10,000 रुपये से अधिक है, तो एडवांस टैक्स न चुकाने का जुर्माना भी लग सकता है। यह आयकर अधिनियम की धारा 234बी और 234सी के तहत ब्याज के रूप में वसूली जाती है।
फॉर्म देना भूल गए हैं तो...
अगर कोई कर्मचारी नई कंपनी में नौकरी शुरू कर चुका है और फॉर्म 122 जमा करना भूल गया है तो भी स्थिति को संभाला जा सकता है। सबसे पहले पुरानी कंपनी से ‘फुल एंड फाइनल’ सेटलमेंट की स्लिप लें। इसमें कुल वेतन और कटे हुए टीडीएस का पूरा हिसाब होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर रिटर्न भरते समय दोनों कंपनियों के फॉर्म 16 को साथ रखें। कुल आय को जोड़ें और देखें कि क्या टीडीएस कम कटा है। यदि हां, तो रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख का इंतजार न करें। बकाया राशि को ‘सेल्फ-असेसमेंट टैक्स’ के रूप में तुरंत जमा करें। इससे मासिक 1% ब्याज से बच जा सकता है।
तरीका-1: एचआर विभाग को दें
सबसे सामान्य तरीका यही है। फॉर्म भरने के बाद कर्मचारी इसे अपनी कंपनी के एचआर या वेतन विभाग में जमा कर सकता है।
तरीका-2: ऑनलाइन जमा करें
अगर कंपनी ऑनलाइन वेतन प्रणाली इस्तेमाल करती है, तो फॉर्म डिजिटल रूप से जमा किया जा सकता है।
तरीका 3: ईमेल के जरिए
कुछ कंपनियां स्कैन कॉपी ईमेल से भी स्वीकार कर सकती हैं। कंपनी की जरूरत के हिसाब से फॉर्म जमा करें।
इन दस्तावेजों की जरूरत होगी?
● पुरानी कंपनी का वेतन पर्चा, पुरानी कंपनी का फॉर्म-16, टीडीएस विवरण, मकान ऋण ब्याज प्रमाण पत्र, बैंक ब्याज प्रमाण पत्र, अन्य आय का विवरण, पैन और आधार की जानकारी
क्या इसे आयकर पोर्टल पर अपलोड करना होगा?
नहीं। आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म 122 को आयकर पोर्टल पर अपलोड करने की जरूरत नहीं है। यह केवल नियोक्ता को दिया जाने वाला घोषणा पत्र है।
● क्या फॉर्म 122 भरना कानूनन अनिवार्य है?
नहीं। यह कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, लेकिन कर्मचारियों के हित में इसे भरना फायदेमंद होगा।
● क्या गैर-वेतनभोगी लोग भी यह फॉर्म भर सकते हैं?
नहीं। यह फॉर्म केवल वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए है।
● फॉर्म 122 भरने का मुख्य फायदा क्या है?
इससे सही टैक्स कटौती होती है, अतिरिक्त टीडीएस कटने से बचाव होता है और बाद में टैक्स रिफंड मांगने की जरूरत कम पड़ती है।
● फॉर्म 122 को कब जमा करने की जरूरत होती है?
नियमों में कोई निश्चित समय सीमा नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ नई नौकरी जॉइन करने के तुरंत बाद इसे जमा करने की सलाह देते हैं।
● क्या गृह ऋण का लाभ भी इसमें लिया जा सकता है?
हां। मकान से होने वाले नुकसान यानी गृह ऋण ब्याज का विवरण भी फॉर्म 122 में दिया जा सकता है। इससे फायदा होगा।
● क्या बैंक ब्याज जैसी अन्य आय भी बतानी होगी?
हां। वेतन के अलावा अन्य कर योग्य आय, जैसे बैंक ब्याज आदि की जानकारी भी दी जा सकती है।
● क्या आयकर रिटर्न के साथ भी यह फॉर्म लगाना होगा?
नहीं। आयकर रिटर्न के साथ इसे संलग्न करने की जरूरत नहीं है।
● क्या फॉर्म 122 से हाथ में मिलने वाला वेतन बढ़ सकता है?
हां। अगर पहले से कहीं टैक्स कट चुका है और उसकी जानकारी नए नियोक्ता को मिल जाती है, तो अतिरिक्त टीडीएस कटने से बचाव हो सकता है। इससे हर महीने हाथ में आने वाला वेतन थोड़ा बढ़ सकता है।
● अगर पुरानी कंपनी ने फॉर्म-16 नहीं दिया हो तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में कर्मचारी वेतन पर्ची, बैंक खाते में आए वेतन और फॉर्म 26एएस की मदद से जानकारी तैयार कर सकता है। हालांकि फॉर्म-16 मिलना सबसे बेहतर माना जाता है।
● क्या निजी और सरकारी दोनों कर्मचारियों पर यह नियम लागू होगा?
हां। यह नियम सभी वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए है, चाहे वे निजी क्षेत्र में हों या सरकारी सेवा में।
● अगर किसी की दो नौकरियां साथ-साथ चल रही हों तो क्या होगा?
ऐसी स्थिति में भी फॉर्म 122 उपयोगी रहेगा। कर्मचारी दोनों संस्थानों की आय और टैक्स विवरण देकर सही कर कटौती सुनिश्चित कर सकता है।
● क्या बोनस और प्रोत्साहन राशि की जानकारी भी देना जरूरी होता है?
हां। पुरानी नौकरी से मिला बोनस, विशेष भत्ता या अन्य कर योग्य भुगतान भी आय का हिस्सा माना जाएगा और उसकी जानकारी देना जरूरी होगा।
● क्या गलत जानकारी देने पर कार्रवाई हो सकती है?
हां। यदि कर्मचारी जानबूझकर आय छिपाता है या गलत विवरण देता है, तो बाद में आयकर विभाग नोटिस जारी कर सकता है और अतिरिक्त टैक्स व जुर्माना भी लग सकता है।

