लखनऊ, स्कूलों के आसपास ट्रैफिक अव्यवस्था के मामले पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने कहा है कि समस्या के समाधान को लेकर न तो पर्याप्त गंभीरता दिखाई गई और न ही पहले दिए गए निर्देशों का प्रभावी पालन हुआ। दरअसल, राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता सुदीप कुमार ने कोर्ट को बताया कि सरकार के जिम्मेदार अफसरों व स्कूल प्रबंधनों ने कोर्ट के निर्देश पर हुई, पिछली बैठक को गंभीरता से नहीं लिया।
उन्होंने कहा कि बैठक में सरकार के सक्षम अफसरों ने हिस्सा ही नहीं लिया। स्कूलों की ओर से भी ऐसे प्रतिनिधि बैठक में पहुंचे जो निर्णय लेने की स्थिति में ही नहीं थे। इस पर कोर्ट ने ट्रैफिक प्रबंधन के लिए व्यापक दिशा निर्देश तैयार किए जाने का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 मई की तिथि नियत की है। यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर व न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
‘सुधार न होना प्रशासनिक इच्छाशक्ति का अभाव’
सुनवायी के दौरान कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार द्वारा प्रशिक्षित अधिकांश मार्शलों की स्कूलों में समुचित तैनाती न होने से ट्रैफिक की समस्या यथावत बनी हुई है। कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त अवसर के बावजूद ठोस सुधार न होना प्रशासन की इच्छाशक्ति और जरूरी पहल के अभाव को दर्शाता है।
छुट्टी होते ही कई मार्गों पर थम रहे वाहन
लखनऊ। दोपहर बाद स्कूलों की छुट्टी के साथ ही हजरतगंज में केडी सिंह बाबू स्टेडियम के पीछे से लेकर राणा प्रताप मार्ग पर किसी भी ओर निकलना मुश्किल हो जा रहा है। निर्देश देने वाले कमिश्नर से लेकर डीएम तक बदलते रहे लेकिन स्थिति जस की तस है।
2015 में तत्कालीन डीएम राज शेखर ने इस व्यवस्था में सुधार की कवायद शुरू की थी, फिर उनका तबादला हो गया। इसके बाद जीएस प्रियदर्शी, अभिषेक प्रकाश, सूर्यपाल गंगवार ने भी डीएम रहते हुए अपने स्तर से प्रयास किए। वर्ष 2022 से 2024 तक तत्कालीन कमश्निर रोशन जैकब ने इसे लेकर जो व्यवस्थाएं बनाई गईं वे कुछ दिन में ध्वस्त हो गईं। स्थिति यह है कि सड़कें चौड़ी हैं, बीच डिवाइडर भी हैं। ट्रैफिक कर्मी भी बाइक से गश्त कर रहे हैं। स्कूल से तैनात ट्रैफिक मार्शल भी है। इसके बाद भी स्कूलों के सामने जाम में फंसकर लोग परेशान हो रहे हैं।

