स्कूलों के संचालन की जिम्मेदारी अब समाज के हिस्से भी होगी
धर्मेंद्र प्रधान ने जारी की स्कूल प्रबंधन समिति की गाइडलाइन
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली: स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सशक्त बनाने की जिम्मेदारी अब सिर्फ सरकार की नहीं होगी, बल्कि समाज भी इसमें हाथ बंटाएगा। इस दिशा में शिक्षा मंत्रालय ने एक बड़ी पहल की है। इसके तहत प्रत्येक सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के संचालन का जिम्मा अब प्रबंधन समिति संभालेगी। जिसके अध्यक्ष से लेकर 75 प्रतिशत सदस्य बच्चों के अभिभावक व संरक्षक होंगे। जबकि समिति के सचिव स्कूल के प्राचार्य होंगे। जो स्कूलों के रखरखाव से लेकर प्रत्येक बच्चे को स्कूल से जोड़ने और उससे बेहतर शिक्षा दिलाने को लेकर काम करेगी। समिति का कार्यकाल दो वर्षों के लिए होगा यानी प्रत्येक दो साल बाद स्कूलों के संचालन के लिए एक नई प्रबंधन समिति गठित होगी।
स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा न मिलने, शिक्षकों के समय से न आने व पीएम-पोषण में गड़बड़ी जैसी शिकायतों को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए समाज को जोड़ने की यह पहल की है। केंद्रीय शिक्षा धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को स्कूल प्रबंधन समिति को लेकर एक विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। साथ ही कहा कि इस पहल से समाज भी अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) से जुड़े इस दिशा-निर्देश को जारी करने के मौके पर दिल्ली व छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री मौजूद थे, जबकि दूसरे राज्यों के शिक्षा मंत्री व विभागीय अधिकारी ऑनलाइन इस कार्यक्रम से जुड़े थे।
स्कूली शिक्षा सचिव संजय कुमार ने इस दौरान सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कहा कि वह प्रत्येक स्कूलों में प्रबंधन समिति गठन करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू कराए। जिलों के शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें इसके अमल के निर्देश दें।
समिति का ऐसा होगा स्वरूप: समिति का यह स्वरूप स्कूलों में बच्चों की संख्या के आधार पर तय होगा। यदि किसी स्कूल में सौ बच्चे हैं, तो वहां समिति 12 से 15 सदस्यीय होगी। वहीं यदि बच्चों की संख्या पांच सौ से अधिक होगी तो समिति के सदस्यों की कुल संख्या 20 से 25 सदस्यीय होगी। इस समिति के अध्यक्ष वहीं अभिभावक होंगे, जिनके बच्चे उस स्कूल में पढ़ते हैं। वहीं समिति की कुल सदस्य संख्या के 75 प्रतिशत अभिभावक होंगे, जबकि समिति के बाकी 25 प्रतिशत सदस्यों में एक तिहाई सदस्य स्थानीय प्राधिकरण के निर्वाचित सदस्य होंगे, जबकि एक तिहाई सदस्य विद्यालय के शिक्षक, बाकी एक तिहाई में स्थानीय शिक्षाविद, विषय विशेषज्ञ, नर्स, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आदि रहेंगी।
मुख्य बिंदु (Side Highlights):
समिति के अध्यक्ष होंगे अभिभावक व सचिव होंगे स्कूल के प्राचार्य
दो वर्ष होगा समिति का कार्यकाल, स्कूल संचालन का देखेगी कामकाज

