05 May 2026

अर्ली वार्निंग सिस्टम से बदलेगी परिषदीय स्कूलों की तस्वीर

 

संभल, परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की घटती उपस्थिति और बढ़ती ड्रॉपआउट दर पर अंकुश लगाने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूलों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसके जरिए छात्रों की उपस्थिति पर कड़ी नजर रखी जाएगी। इस व्यवस्था के तहत यदि किसी छात्र की मासिक औसत उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम होती है या वह लगातार तीन दिनों तक विद्यालय से अनुपस्थित रहता है, तो उसके अभिभावकों के मोबाइल पर तुरंत एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से सूचना भेजी जाएगी। जिले के 1289 परिषदीय विद्यालयों में लगभग 1.50 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन सभी विद्यार्थियों की उपस्थिति का डेटा ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा और इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी।




इससे न केवल विद्यार्थियों की उपस्थिति में सुधार होगा, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित होगा। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिक्षण सत्र 2026-27 में प्रत्येक छात्र की 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। इसके लिए विद्यालय स्तर पर विशेष अभियान चलाने की भी योजना बनाई जा रही है। वार्षिक परीक्षा से पहले प्रत्येक छात्र की उपस्थिति रिपोर्ट तैयार की जाएगी और जिन छात्रों की उपस्थिति कम होगी, उनके अभिभावकों को पहले से सचेत किया जाएगा। हाल ही में अपर मुख्य सचिव बेसिक की ओर से आयोजित समीक्षा बैठक में इस अर्ली वार्निंग सिस्टम को जल्द से जल्द लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि समय पर सूचना मिलने से अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई के प्रति अधिक जागरूक होंगे और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित करेंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलका शर्मा ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य ड्रॉपआउट दर को कम करना, छात्रों की उपस्थिति बढ़ाना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। उन्होंने बताया कि इस नई तकनीक के उपयोग से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और हर छात्र तक शिक्षा की पहुंच प्रभावी हो सकेगी।