शर्तें नहीं मानीं तो बोर्ड कॉपी नहीं जांचेंगे, डेढ़ हजार शिक्षकों ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक कार्यालय को घेरा


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के बैनर तले बुधवार को करीब डेढ़ हजार शिक्षकों ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक कार्यालय का घेराव एवं प्रदर्शन किया। सुबह 10 बजे से देर शाम तक करीब नौ घंटे धरना चला। अफसरों के ढुलमुल रैवये से नाराज शिक्षक सड़क पर आ गए और लंबित मांगों के जल्द निस्तारण को लेकर नारेबाजी की। शिक्षक विधानभवन की ओर बढ़ने लगे लेकिन उनको बीच में रोक दिया गया। वहीं माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने गुरुवार को वार्ता के लिए समय दिया है।


शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा ने चेतावनी दी कि शासन अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की खत्म की गई सेवा सुरक्षा शर्तों की जल्द बहाल करे। अन्यथा शिक्षक 16 मार्च से शुरू हो रही यूपी बोर्ड परीक्षाओं की कापियों के मूल्यांकन का बहिष्कार करेंगे।

शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा ने कहा कि चयन बोर्ड अधिनियम 1982 को रद्द करके उसके तहत मिलने वाली धारा 21 की सुरक्षा को शासन ने खत्म कर दिया। आठ माह से पूरे प्रदेश में पदोन्नति बंद है। कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को मिलने वाले प्रधानाचार्य ग्रेड को खत्म कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार बता दें कि केन्द्र सरकार एक अप्रैल 2005 के पूर्व के विज्ञापन पर नियुक्ति पाये कार्मिकों को पुरानी पेंशन दे चुकी है, लेकिन प्रदेश सरकार उस निर्णय को लागू नहीं कर रही है।

इस मौके पर प्रदेशीय कोषाधक्ष बिजेन्द्र वर्मा ने कहा कि न्यू पेंशन स्कीम में शिक्षकों के वेतन से कटौती प्रतिमाह हो रही लेकिन सरकारी अंशदान का ग्रांट समय से न मिलने के कारण शिक्षकों के प्रान खाते में कटौती की राशि समय से नहीं भेजी रही है। इस मौके पर प्रदेशीय मंत्री संदीप शुक्ला, उपाध्यक्ष उपेन्द्र वर्मा, संतराम बौद्ध, पवन कुमार यादव, माइनुद्दीन अंसारी,तीर्थराज पटेल, पुरुषोत्तम वर्मा समेत करीब डेढ़ हजार शिक्षकों ने विरोध दर्ज कराया।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) ने बुधवार को धरना प्रदर्शन किया। शिक्षक विधान भवन की ओर भी बढ़े लेकिन रास्ते में रोक दिया गया।


तीनों बोर्ड के मूल्यांकन पारिश्रमिक में भी अंतर
सीबीएसई और यूपी बोर्ड की कापियों का मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों के पारिश्रमिक में तिगुने से अधिक का अंतर है। शिक्षकों में नाराजगी है। शिक्षकों का आरोप है सीबीएसई के परीक्षकों के मुकाबले इन्हें कम पारिश्रमिक दिया जाता है। माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रदेश अध्यक्ष सोहनलाल वर्मा ने बताया कि संगठन की ओर से कई साल से मूल्यांकन का पारिश्रमिक बढ़ाने की मांग हो रही है। 16 मार्च से यूपी बोर्ड परीक्षाओं के हाईस्कूल और इंटरमीडएट की कॉपियों का मूल्यांकन शुरू होना है। सीबीएसई शिक्षकों को प्रति कापी मूल्यांकन का 40 रुपये देता है। इन्हें प्रत्येक दिन जलपान के लिए 100 रुपये देता है। जबकि यूपी बोर्ड हाईस्कूल की प्रति उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन के एवज में 11 रुपये व इंटर में 13 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका भुगतान करता है। वहीं जलपान के लिए रोज का महज 20 रुपये मिलता है। इस 20 रुपये में लंच छोड़िये इसमें दो चाय भी पी पाना मुश्किल होता है।