लखनऊः आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए इंतजार खत्म हुआ। निश्शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 में निजी स्कूलों में प्री प्राइमरी और कक्षा एक की 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश के लिए दो फरवरी से आवेदन शुरू होंगे। पूरी प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी.
पहले चरण में दो फरवरी से 16 फरवरी तक आवेदन किए जा सकेंगे। दूसरे चरण के आवेदन 21 फरवरी से सात मार्च तक और तीसरे चरण में 12 मार्च से 25 मार्च तक आवेदन किए जा सकेंगे। आरटीई के तहत पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं (नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी) और कक्षा एक में प्रवेश मिलेगा। नर्सरी के लिए आयु तीन से चार वर्ष, एलकेजी के लिए चार से पांच वर्ष, यूकेजी के लिए पांच से छह वर्ष और कक्षा एक के लिए छह से सात वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना एक अप्रैल 2026 से की जाएगी। आरटीई के तहत आवेदन के समय अभिभावक का आधार कार्ड अनिवार्य होगा। अलाभित समूह के लिए तहसीलदार द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र और तहसील से जारी निवास प्रमाणपत्र मान्य होंगे। पहचान के लिए मतदाता परिचय पत्र, राशन कार्ड, जाब कार्ड (ग्रामीण क्षेत्र), पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, बिजली व पानी के बिल स्वीकार किए जाएंगे। दुर्बल वर्ग के लिए बीपीएल राशन कार्ड और तहसील से जारी आय प्रमाणपत्र जरूरी है। आवेदन में ग्राम पंचायत या वार्ड चुनकर आसपास के अधिकतम 10 विद्यालय प्राथमिकता के आधार पर चयन किए जा सकेंगे। पात्रता में एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग, अनाथ, एचआइवी या कैंसर पीड़ित माता-पिता के बच्चे व एक लाख रुपये तक पारिवारिक आय वाले दुर्बल वर्ग के बच्चे शामिल हैं। आवेदनों के बाद लाटरी के माध्यम से स्कूलों का आवंटन किया जाएगा। पहले चरण की लाटरी 18 फरवरी, दूसरे चरण की नौ मार्च और तीसरे चरण की 29 मार्च को निकाली जाएगी। लाटरी के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा चयनित बच्चों के नामांकन के लिए संबंधित विद्यालयों को आदेश जारी किए जाएंगे। सभी आवंटित बच्चों का नामांकन 11 अप्रैल तक पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं.
आरटीई पोर्टल से आवेदन
आरटीई के तहत आवेदन www. rte25.upsdc.gov.in पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। प्रदेश के करीब 68 हजार निजी स्कूलों में लगभग छह लाख सीटों पर प्रवेश के लिए आवेदन होंगे। पिछले वर्ष 3.37 लाख आवेदन आए थे, जिनमें से 2.54 लाख स्वीकृत हुए और 1.85 लाख सीटों का आवंटन किया गया। इसमें 1.41 लाख बच्चों को प्रवेश मिला था।

