निश्चित रूप से, नए वेतन संहिता (Code on Wages) के अनुसार सैलरी स्ट्रक्चर बनाना अब थोड़ा तकनीकी हो गया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि आपके सभी भत्ते (Allowances) आपकी कुल सैलरी (CTC) के 50% से अधिक नहीं हो सकते।
यहाँ एक ₹1,00,000 प्रति माह (₹12 LPA) के ग्रॉस वेतन (Gross Salary) के आधार पर पुराना बनाम नया (आदर्श) सैलरी ब्रेकअप दिया गया है:
सैलरी ब्रेकअप तुलना: ₹1,00,000 प्रति माह (Gross)
| घटक (Components) | पुराना स्ट्रक्चर (अनुमानित) | नया स्ट्रक्चर (आदर्श - 50% नियम) | प्रभाव |
| बेसिक पे + DA | ₹35,000 (35%) | ₹50,000 (50%) | बढ़ गया |
| HRA | ₹14,000 | ₹20,000 | कंपनी नीति पर निर्भर |
| अन्य भत्ते (LTA, Special, आदि) | ₹51,000 | ₹30,000 | कम हो गए |
| कुल ग्रॉस वेतन | ₹1,00,000 | ₹1,00,000 | - |
| PF योगदान (Employer/Employee) | ₹4,200 (12% of 35k) | ₹6,000 (12% of 50k) | बढ़ गया |
| ग्रेच्युटी प्रोविजन | कम | अधिक | भविष्य के लिए बेहतर |
नया नियम लागू होने के बाद मुख्य प्रभाव:
रिटायरमेंट फंड में बढ़ोतरी: चूंकि PF और ग्रेच्युटी की गणना बेसिक पे पर होती है, इसलिए बेसिक पे बढ़ने से आपका पीएफ फंड और ग्रेच्युटी की राशि काफी बढ़ जाएगी। यह लंबी अवधि की बचत के लिए बेहतरीन है।
टेक-होम सैलरी (Take-home Pay): क्योंकि पीएफ (PF) का हिस्सा आपकी सैलरी से ज्यादा कटेगा, इसलिए आपके हाथ में आने वाली मासिक नकदी (In-hand salary) में 2% से 5% की मामूली कमी आ सकती है।
टैक्स पर असर (New Tax Act 2025): * यदि आप पुराने टैक्स स्लैब में हैं, तो बेसिक बढ़ने से HRA छूट का लाभ बढ़ सकता है।
यदि आप नए टैक्स स्लैब (Default) में हैं, तो टैक्स की गणना आपकी कुल आय पर आधारित होगी, जहाँ 50% नियम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा (Social Security) को मजबूत करना है।
नियोक्ताओं (Employers) के लिए चेकलिस्ट:
सॉफ्टवेयर अपडेट: सुनिश्चित करें कि आपका पेरोल सॉफ्टवेयर आयकर अधिनियम 2025 के नए TDS स्लैब के अनुसार कॉन्फ़िगर है।
अनुपालन: यदि भत्ते 50% से अधिक हैं, तो अतिरिक्त राशि को 'बेसिक' का हिस्सा माना जाएगा और उस पर PF देना होगा।
प्रो टिप: यदि आपकी कंपनी में बोनस या ओवरटाइम का चलन है, तो याद रखें कि नए नियमों के तहत ओवरटाइम की गणना अब बढ़ी हुई बेसिक सैलरी (50% वाली) पर होगी, जो कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है।

