24 March 2026

लंबे समय तक भर्ती टालना उचित नहीं, आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को लेकर हाईकोर्ट का आदेश

 

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने सरकारी संस्थानों द्वारा नियमित नियुक्तियों को दरकिनार कर लंबे समय तक आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारियों से काम लेने की प्रवृत्ति को शोषण और अन्याय को बढ़ावा देने वाला बताया है। कोर्ट ने कहा कि जब किसी कर्मचारी से लंबे समय तक लगातार काम लिया जाता है और उसका कार्य विभाग के लिए आवश्यक व स्थायी प्रकृति का है तो उसे आउटसोर्सिंग के जरिए रखना शोषणकारी व्यवस्था का संकेत है।




कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह की व्यवस्था से न केवल कर्मचारियों के साथ अन्याय होता है, बल्कि सरकार नियमित भर्ती प्रक्रिया को भी नजरअंदाज करती है। न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने इस टिप्पणी के साथ बरेली नगर निगम को 13 वर्षों से आउटसोर्स पर काम कर रहे कंप्यूटर ऑपरेटर के नियमितीकरण पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।


याची कफी अहमद खान 2011 से नगर निगम में कार्यरत था। पहले उसे दैनिक वेतन पर रखा गया। बाद में उसकी सेवा एक ठेकेदार के माध्यम से जारी रखी गई। 13 साल से अधिक समय तक लगातार काम करने के बावजूद नियमितीकरण के लिए उसका प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने कहा कि राज्य एक आदर्श नियोक्ता होता है। उसका कर्तव्य है कि कर्मचारियों के साथ निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करे, न कि उनका शोषण करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब किसी विभाग में काम स्थायी रूप से बढ़ता है तो सरकार को स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ानी चाहिए, न कि आउटसोर्सिंग से काम चलाना चाहिए। कोर्ट ने चिंता जताई कि लंबे समय तक अस्थायी रूप से काम करने वाले कर्मचारी आयु सीमा पार कर जाते हैं और बाद में नियमित भर्ती में भाग लेने का अवसर भी खो देते हैं। इन सभी पहलुओं को देखते हुए कोर्ट ने नगर आयुक्त का आदेश रद्द कर दिया और को चार महीने के भीतर याची के नियमितीकरण पर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया।