परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूल में विज्ञान और गणित विषयकी 29,334 सहायक अध्यापक भर्ती के तहत मंगलवार को जारी 1113 अभ्यर्थियों की सूची में शामिल तमाम अभ्यर्थियों के लिए सरकारी शिक्षक बनने का सपना तो पूरा हो गया है लेकिन उनकी खुशी में मायूसी भीछिपी है। इस सूची में कई ऐसे अभ्यर्थी भी हैं, जिन्होंने एक दशक तक कानूनी लड़ाई लड़ी है लेकिन उन्हें छह-सात साल ही पढ़ाने का मौका मिलेगा।
उदाहरण के तौर पर आजमगढ़ के फैजुल्लाहपुर गांव निवासी मनोजकुमार चौहान को ही लें। उन्हें दुःख इस बात का है कि जितने साल हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक नौकरी के लिए लड़ाई लड़े हैं उससे भी कम समय तक अध्यापन कर सकेंगे। 11 जुलाई 2013 को जब भर्ती आई तो मनोज की आयु 43 साल थी। भर्ती में अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की अधिकतम आयुसीमा 40 साल जबकि ओबीसी और एससीटी समेत अन्य आरक्षित वर्ग को 45 साल या अधिक आयु पर आवेदन के योग्य माना गया था। मनोज जैसे आरक्षित वर्ग के सैकड़ों अभ्यर्थियों ने भर्ती में आवेदन किया लेकिन काउंसिलिंग के दौरान 2017 में बनी नई सरकार ने चयन पर रोक लगा दी।
उसके बाद से कानूनी लड़ाई शुरू हुई, जो पिछले साल यानी लगभग दस साल तक चलती रही। 29 जनवरी 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नौकरी की उम्मीद जगी। एक दशक की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब जब नौकरी मिलने जा रही है तो मनोज की उम्र 56 साल हो चुकी है। चूंकि परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 साल है तो उन्हें महज छह साल अध्यापन का मौका मिलेगा। इसी प्रकार 10 सितंबर 1970 को जन्मे अमरोहा के चन्द्रपाल सिंह का चयन 56 साल में हुआ है और उन्हें भी छह साल पढ़ाने का मौका मिलेगा। दो सितंबर 1973 को जन्मे मुजफ्फरपुर के बलकेश को भी 53 साल की उम्र में नौकरी मिलने जा रही है और वह नौ साल बाद सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इस सूची में शामिल कई अभ्यर्थियों को दस साल से कम नौकरी का अवसर मिलेगा।

