मऊ : मां-बाप ने उनका नाम गगन रखा था। मगर, उनके जीवन की कहानी संघर्ष भरी रही। उनके हिस्से में आया था अंधेरा। किस्मत भी उनसे रूठी रही। गगन मां-बाप की संतान गगन राम ने दो आंखों से दिव्यांग हैं। मगर, उन्होंने अपने हौसले से सफलता उड़ान भरी है। सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में 95.4 प्रतिशत अंक पाकर सबको चौका दिया। गगन जिले के मधुबन संगम सिंह इंटर कालेज सिद्धि के छात्र हैं। गगन पढ़ाई करना चाहते हैं, उन्होंने विषय में बीए करना चाहते हैं। बीएचयू विश्वविद्यालय कालेज आफ लंदन में प्रवेश के लिए आवेदन किया था।
आंखों से दिव्यांग किसान के बेटे ने 10वीं की परीक्षा में पिछली वर्ष 91.2 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। उन्हें यूपीएससी सिविल जज के हेल्थ में प्रवेश के लिए चयन हुआ है। गरीब परिवार से होने के बावजूद 55 हजार रुपये प्रतिवर्ष छात्रवृत्ति प्रदान की गई। इससे उनके पढ़ाई की आर्थिक मदद मिल रही है।
संघर्षों को दी चुनौती : मऊ के मधुबन निवासी गगन सिंह रावत को बिना लिखे किसी परीक्षा में सफलता नहीं मिलती। वे तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े गगन राम का जन्म से ही आंखों से दिव्यांग होना परिवार के लिए चिंता का विषय बना। मगर उनके भाई और मां के साथ बचपन से उनका संघर्ष लगातार जारी रहा। गगन के स्कूल में पढ़ाई का सफर आसान नहीं था। आंखों से दिखाई न पड़ने की वजह से उन्हें पढ़ने में काफी परेशानी होती थी। उन्हें ब्रेल लिपि नहीं आती थी। ऐसे में मोबाइल पर टेक्स्ट पढ़कर और सुनकर वे पढ़ाई करते रहे।
गगन को पढ़ाई के दौरान हमेशा परिवार और शिक्षकों का सहयोग मिला। उनके स्कूल के शिक्षकों ने उनके लिए अलग से पढ़ाई की व्यवस्था की। परीक्षा में लिखने के लिए लेखक की मदद ली गई। गगन की मेहनत और शिक्षकों के सहयोग का ही परिणाम है कि उन्होंने 95.4 प्रतिशत अंक हासिल किए। गगन का सपना है कि वे आगे चलकर प्रशासनिक सेवा में जाएं और समाज के लिए प्रेरणा बनें।

