05 May 2026

वर्षों से बेसिक स्कूलों से पढ़ा रहे मास्टरों को भी देना होगा इम्तिहान, सुप्रीम कोर्ट कर चुका है सख्ती

UPTET में एक तरफ जहां नए उम्मीदवारों के चेहरों पर खुशी की लहर है, वहीं दूसरी तरफ पुराने शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के तहत इस परीक्षा का पास करने की चुनौती भी है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पुराने टीचरों के लिए भी टीईटी परीक्षा को पास करना अनिवार्य कर दिया है।



पुराने शिक्षकों की नींद क्यों उड़ी है?

इस बार यूपीटीईटी का यह इम्तिहान सिर्फ नए बेरोजगारों के लिए नहीं है, बल्कि सालों से स्कूलों में अपनी सेवा दे रहे उन 1.86 लाख शिक्षकों के लिए भी एक बड़ा इम्तिहान साबित होने वाला है, जो 2011 से पहले नियुक्त हुए थे। हाल ही में संसद के अंदर केंद्र सरकार ने यह बात बिल्कुल साफ कर दी है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अब न्यूनतम अनिवार्य योग्यता है और इसमें किसी भी तरह की सामूहिक छूट देने का कोई इरादा नहीं है।



सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में साफ कर दिया था कि पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों को भी टीईटी पास करना जरूरी होगा। नियम के मुताबिक, जिन शिक्षकों की नौकरी में अभी पांच साल से ज्यादा का वक्त बचा है, उन्हें इस फैसले की तारीख से दो साल के अंदर हर हाल में टीईटी पास करना होगा। और जिनकी सर्विस में पांच साल से कम का वक्त बचा है, वो बिना टीईटी पास किए रिटायरमेंट तक नौकरी तो कर सकेंगे, लेकिन उन्हें कोई प्रमोशन नहीं मिलेगा।


पुराने शिक्षक परीक्षा की अनिवार्यता से परेशान

शिक्षक संगठनों का दर्द भी अपनी जगह जायज मालूम पड़ता है। अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय सह-संयोजक और यूपी बीटीसी शिक्षक संघ के मेंबर की मानें तो उन्हें सरकार से काफी उम्मीदें थीं कि कोई न कोई ऐसा रास्ता निकलेगा जिससे बरसों से पढ़ा रहे शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित हो सके। शिक्षक संघ के वरिष्ठ नेता निर्भय सिंह का दर्द भी छलक कर सामने आया। उनका कहना है कि जो शिक्षक अपनी आधी से ज्यादा उम्र स्कूलों में गुजार चुके हैं और अपनी काबलियत साबित कर चुके हैं, उन पर अब इस नई परीक्षा का बोझ डालना नाइंसाफी है। बढ़ती उम्र, पारिवारिक जिम्मेदारियों और ढलती सेहत के साथ नए सिरे से परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं होता, जो उनके लिए एक गहरे मानसिक तनाव का सबब बन रहा है।


हालांकि, यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका (Review Petition) जरूर दाखिल कर रखी है, लेकिन जब तक वहां से कोई राहत भरी खबर नहीं आती, तब तक इन शिक्षकों के सिर पर टीईटी की तलवार लटकती ही रहेगी। कुल मिलाकर, अब इस नोटिफिकेशन के आने के बाद साफ हो गया है कि यह महज एक परीक्षा नहीं, बल्कि कई लोगों के मुस्तकबिल का फैसला करने वाली एक बड़ी जंग बन चुकी है।



जुलाई के पहले हफ्ते में होगा इम्तिहान

नोटिफिकेशन के मुताबिक, यूपीटीईटी 2026 की परीक्षा 2, 3 और 4 जुलाई को राज्य में निर्धारित केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। इसके लिए 22 जून को उम्मीदवारों की 'सिटी स्लिप' जारी कर दी जाएगी। इस स्लिप के जरिए उन्हें यह पता चल जाएगा कि उनका परीक्षा केंद्र किस शहर या जिले में पड़ा है, ताकि वे अपने सफर का इंतजाम पहले से कर सकें। वहीं, 30 जून को आधिकारिक वेबसाइट पर एडमिट कार्ड अपलोड कर दिए जाएंगे।


कैसा होगा परीक्षा का पैटर्न

इस परीक्षा के पैटर्न की बात करें तो नेशनल काउंसिल फॉर टीचिंग एंड एजुकेशन (NCTE) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, इसका फॉर्मेट वही पुराना रहेगा। पहली कक्षा से लेकर पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाने की ख्वाहिश रखने वालों को 'पेपर 1' देना होगा, जबकि छठी से आठवीं कक्षा तक पढ़ाने के लिए 'पेपर 2' का इम्तिहान पास करना होगा। चूंकि इस बार पुराने और अनुभवी शिक्षक भी परीक्षा में बैठेंगे, इसलिए मुकाबला काफी दिलचस्प और कड़ा होने की उम्मीद है।