इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में पुलिस कांस्टेबल की मौत पर राज्य सरकार को उसकी पत्नी को छह प्रतिशत ब्याज सहित दस लाख रुपये मुआवजे का भुगतान आठ सप्ताह में करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता ने दिवंगत पुलिस कांस्टेबल कमलेश की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
कोर्ट ने कहा कि 28 जुलाई 2010 का शासनादेश एक जनवरी 2006 से लागू किया गया था और याची के पति की मौत आठ मई 2006 को दुर्घटना में हुई थी इसलिए ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में मौत के लिए उसकी पत्नी मुआवजा पाने की हकदार है। कोर्ट ने याची को मुआवजा देने से इनकार करने के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि मौत से मुआवजे का भुगतान होने तक छह प्रतिशत ब्याज भी दिया जाए। याची के अधिवक्ता अशोक कुमार ने कोर्ट को बताया कि याची के पति पुलिस कांस्टेबल थे। फ़िरोज़ाबाद के बसई मोहम्मदपुर थाने में तैनाती के दौरान मुख्यालय से डाक लेकर वापस आते समय दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई। राज्य सरकार ने 19 अगस्त 1988 के शासनादेश के हवाले से मुआवजा देने से इनकार कर दिया।
जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार के तर्क को नहीं माना और कहा 2010 का शासनादेश 2006 में लागू हो चुका था इसलिए याची मुआवजा पाने की हकदार है।2010 के शासनादेश से 1988 के शासनादेश की शर्तों में बदलाव किया गया है और अब 1988 का शासनादेश लागू नहीं होगा।

