लखनऊ। जनगणना-2027 को लेकर कई अहम प्रावधान किए गए हैं। इसी के तहत प्रदेश के जो लोग लंबे समय से विदेश में रह रहे होंगे, उनकी गणना नहीं की जाएगी। उनकी पारिवारिक यूपी में निवास कर रहे होंगे, केवल उन्हें ही गणना में शामिल किया जाएगा।
जनगणना का पहला चरण 22 मई से शुरू होगा, जो 20 जून तक चलेगा। मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने बताया कि प्रदेश के जो भी लोग लंबे समय से विदेश में रह रहे होंगे, उनकी गणना नहीं की जाएगी। अगर उनके परिवार वाले यहां पर होंगे, तो उन्हें जनगणना में शामिल किया जाएगा। जो लोग टूरिस्ट के तौर पर कुछ दिनों के लिए विदेश गए हैं, उनकी गणना होगी। इसमें किसी को कोई संशय नहीं होना चाहिए।
किरायेदार की भी गणना वहीं होगी, जहां रह रहे होंगे : अधिकारियों ने बताया कि जिन मकानों में किरायेदार रह रहे होंगे, उनकी गणना उसी शहर में होगी। ऐसा संभव नहीं है कि किरायेदार के मूल निवास में गणना हो। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि जो भी जानकारी वे स्वयं भरें या जनगणना कर्मी से भरवाएं, वह पूरी तरह सही हो। कोई गलत ब्यौरा न बताएं। विभाग की तरफ से लोगों को आश्वस्त किया गया है कि पूरा डेटा गोपनीय रखा जाएगा, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।
लापता प्रकरण में परिवार का बयान अहम
प्रदेश में तमाम ऐसे लोग भी हैं जो लापता हैं, जिनकी मिसिंग पुलिस में भी दर्ज है। ऐसे लोगों का गणना में किस तरह से शामिल किया जाएगा, इस बारे में मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी ने बताया कि लापता लोगों के परिवार से जब जनगणना कर्मी संपर्क करेंगे, तो जैसी वे जानकारी देंगे, उसी आधार पर उन्हें जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। अगर किसी को लापता हुए कई वर्ष बीत गए हैं और परिजन कहते हैं कि उनके मिलने की उम्मीद नहीं है तो उन्हें मृत मान लिया गया है। ऐसे लोगों का नाम शामिल नहीं किया जाएगा। वहीं, अगर परिजन कहते हैं कि उन्हें हर हाल में लापता सदस्य के मिलने की उम्मीद है, तो ऐसे लोगों की गणना की जाएगी। कुछ मिलते-जुलते मामलों में संबंधित व्यक्ति के परिजनों का बयान अहम है।

