महोबा। कबरई के एक प्राथमिक विद्यालय की निलंबित प्रधानाध्यापिका ने बीएसए पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिक्षिका का कहना है कि विद्यालय परिसर की क्षतिग्रस्त बाउंड्रीवाल की समस्या बताने गई तो बीएसए घूरकर देखने लगे और शाम को अपने आवास बुलाया। मना करने पर जांचें कराकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और बिना साक्ष्य निलंबित कर दिया। वह उसका शारीरिक शोषण करना चाहते हैं। साथी शिक्षक भी साहब की बात मानने का दबाव बना रहे हैं।
शिक्षिका ने एसपी शशांक सिंह को शिकायती पत्र सौंपकर बीएसए और दो शिक्षकों पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। उधर, बीएसए राहुल मिश्रा ने आरोपों को निराधार बताया है। डीएम गजल भारद्वाज ने जांच के लिए चार सदस्यीय टीम बनाई है, जो एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट देगी।
बीएसए ने आवास पर आने को कहा
निलंबित प्रधानाध्यापिका ने रविवार को पत्रकार वार्ता कर बताया कि वह कबरई के एक विद्यालय में वर्ष 2018 से प्रधानाध्यापिका थी। पिछले साल एक फरवरी को वह विद्यालय समय के बाद बीएसए कार्यालय गई। कार्यालय से निकल रहे बीएसए ने उसे शाम को आवास में आने की बात कही।
पिता को अपमानित किया
विद्यालय की महिला सहायक अध्यापक समेत दो शिक्षक ने कहा कि साहब को गुलाब बहुत पसंद है, हमारे साथ उनके आवास चलो वह खुश हो जाएंगे। मानसिक रूप से परेशान होकर 27 फरवरी 2026 को 73 वर्षीय पिता के साथ बीएसए कार्यालय गईं। बीएसए ने पिता को अपमानित कर बाहर निकाल दिया और कहा कि मेरी बात मान जाओ तो प्रमोशन करा दूंगा। उन्होंने अश्लील बातें की और गाली-गलौज कर बदनीयती से पकड़ने की कोशिश की। कार्यालय के लोगों ने भी फोन कर कहा कि साहब की बात मान जाओ सब ठीक हो जाएगा। बात नहीं मानने पर बिना समुचित साक्ष्य के निलंबन आदेश जारी कर दिया।
मुकदमा दर्ज कराने की मांग
पीड़िता ने बीएसए सहित विद्यालय के सहायक अध्यापकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। बीएसए राहुल मिश्रा का कहना है कि यदि अध्यापिका के पास साक्ष्य हो तो दिखाएं। जांच समिति के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। डीएम द्वारा गठित चार सदस्यीय टीम में एडीएम नमामि गंगे, सदर एसडीएम, जिला प्रोबेशन अधिकारी व जिला महिला चिकित्सालय की महिला चिकित्साधिकारी शामिल हैं। टीम एक सप्ताह के अंदर जांच करके आख्या जिलाधिकारी को उपलब्ध कराएगी।
आरोपित महिला सहायक अध्यापक ने भी एसपी को सौंपा पत्र
विद्यालय की महिला सहायक अध्यापक ने भी एसपी को पत्र सौंपा। बताया कि निलंबित प्रधानाध्यापिका उन पर झूठे चरित्र-हनन संबंधी आरोप लगा रही हैं, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हैं। बताया कि पूर्व में उन्होंने व अन्य शिक्षकों ने उनके द्वारा किए जा रहे मानसिक शोषण, एमडीएम में अनियमितता व सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायत बीएसए से की थी। इस पर पांच सदस्यीय टीम गठित हुई थी। जनवरी 2026 में दोषी पाए जाने पर उन्हें निलंबित किया गया था। इसके पहले भी वह कई बार गलत आरोप लगा चुकी हैं। उन्हें 21 सितंबर 2010 को भी गंभीर आरोपों में निलंबित किया जा चुका है। साथ ही एक वर्षीय वेतन अवरुद्ध की कार्रवाई भी हो चुकी है। फर्जी शिकायत करने पर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।

