यूपी शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) 2026 के लिए 16,16,538 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। शिक्षा सेवा चयन आयोग ने आवेदन की अंतिम तिथि 26 अप्रैल से बढ़ाकर तीन मई कर दी थी। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि तीन मई तक बढ़ाए जाने का लाभ प्रदेश के लगभग 50 हजार से अधिक ऐसे शिक्षकों को भी मिला है, जिन्होंने दूरस्थ शिक्षा (ओडीएल) माध्यम से डीएलएड किया है। आवेदन पत्र में संशोधन व शुल्क समाधान की अंतिम तिथि आठ मई है। प्राथमिक उच्च प्रा स्तर की यूपी-टीईटी के लिए मिले आवेदन की संख्या मंगलवार को मिलने की उम्मीद है। 2021 में प्राथमिक स्तर की टीईटी को कुल 21,65,181 ने पंजीकरण कराया था। यूपीटीईटी (UPTET) 2026 की परीक्षा 2, 3 और 4 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी।
सेवारत शिक्षकों को भी पास करनी है यूपी टीईटी
लंबे अंतराल के बाद होने जा रही इस परीक्षा में पहली बार लाखों बेरोजगार अभ्यर्थियों के आवेदन की उम्मीद थी। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 के आदेश के बाद 2011 से पहले परिषदीय स्कूलों में नियुक्त सेवारत शिक्षकों को भी यूपी-टीईटी पास करनी है। शीर्ष अदालत के आदेश के मुताबिक जिन शिक्षकों के पास पांच साल से कम की सेवा बाकी है, उन्हें बिना टीईटी के सेवानिवृत्ति तक काम करने की छूट दी थी लेकिन उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी। जिनके पास पांच साल से अधिक की सेवा बाकी है, उन्हें दो साल के अंदर टीईटी पास करना होगा, वरना अनिवार्य सेवानिवृत्ति लेनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से उत्तर प्रदेश के लगभग ढाई लाख शिक्षक परिवारों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है।
इसके लिए चयन आयोग ने व्यापक पैमाने पर तैयारियां की है। किसी प्रकार का फर्जीवाड़ा रोकने के लिए एसटीएफ और एलआईयू आदि की भी सहायता ली जाएगी ताकि नकलविहीन और शुचितापूर्ण परीक्षा कराई जा सके। चूंकि आयोग के अध्यक्ष स्वयं पुलिस विभाग के शीर्ष अधिकारी रहे हैं इसलिए नकल माफियाओं के लिए इस परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी करना आसान काम नहीं होगा।
नियमों में बदलाव
- UPTET मे पहली बार ईडब्ल्यूएस को भी मिलेगा आरक्षण।
- 55% पर होंगे EWS, OBC,SC, ST अर्थात 150 में 82 नम्बर पर पास।
- 60% न्यूनतम अंक लाना होगा अनारक्षित के लिए अर्थात 150 में से 90 नम्बर।
5 साल बाद होने जा रही यूपी टीईटी परीक्षा में किसी प्रकार का फर्जीवाड़ा रोकने के लिए इस बार आवेदन के समय से ही सख्त कदम उठाए गए हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने आवेदन के समय जुड़वा भाई या बहन की भी सूचना मांगी है। इसके अलावा अब सभी अभ्यर्थियों को अपनी लाइव फोटो लगानी होगी।
यूपी टीईटी उन उम्मीदवारों के लिए अहम परीक्षा है जो उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनना चाहते हैं। गौरतलब है कि यह परीक्षा दो स्तरों पर होती है, जिसमें एक प्राथमिक स्तर यानी कक्षा 1 से 5 और दूसरा उच्च प्राथमिक स्तर यानी कक्षा 6 से 8 के लिए होता है। इन दोनों स्तरों पर पढ़ाने के लिए यह परीक्षा पास करना जरूरी होता है।
उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग नॉर्मलाइजेशन (मानकीकरण) लागू कर सकता है। चयन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार यूपी-टीईटी 2026 में प्राप्त आवेदन पत्रों की संख्या अत्यधिक होती है और सभी अभ्यर्थियों की लिखित परीक्षा एक ही पाली और दिन में आयोजित किया जाना सुविधाजनक नहीं होता है तो लिखित परीक्षा एक से अधिक पालियों और दिनों में आयोजित की जा सकती है। यदि परीक्षा एक से अधिक पालियों या दिनों में आयोजित की जाती है तो अभ्यर्थियों के तुलनात्मक मूल्यांकन के लिए स्कोर के नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया लागू होगी। मानकीकरण में वही फॉर्मूला लागू होगा जो कर्मचारी चयन आयोग, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड आदि की ओर से लागू किया जाता है। ऐसा होने पर अंकों को लेकर विवाद होना तय है। जब परीक्षा कई शिफ्टों में होती है, तो हर शिफ्ट का पेपर समान कठिनाई का नहीं होता। तमाम अभ्यर्थियों का मानना है कि कठिन शिफ्ट में अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद नॉर्मलाइजेशन के बाद उनके अंक कम हो सकते हैं।

