पहले दिन परिषदीय स्कूलों में फीकी रही रौनक, 20 प्रतिशत से भी कम रही छात्रों की उपस्थिति
लखनऊ। 27 दिनों के ग्रीष्मावकाश के बाद मंगलवार को प्रदेश के परिषदीय विद्यालय खुल गए, लेकिन पहले ही दिन छात्रों की उपस्थिति उम्मीद से काफी कम रही। राजधानी लखनऊ के कई विद्यालयों में जहां बच्चों का रोली-टीका लगाकर स्वागत किया गया, वहीं अनेक स्कूलों में उपस्थिति 20 प्रतिशत से भी कम दर्ज की गई। कुछ विद्यालयों में तो ताला लटका मिला और बच्चे वापस घर लौट गए।
शहर में कम, ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर रही उपस्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, शहरी क्षेत्रों के विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति 20 प्रतिशत से भी कम रही, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 30 से 35 प्रतिशत तक बच्चे विद्यालय पहुंचे। भीषण गर्मी और उमस को कम उपस्थिति का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
गर्मी से बेहोश हुई छात्रा
काकोरी क्षेत्र के एक संविलियन प्राथमिक विद्यालय में पहले ही दिन एक छात्रा गर्मी के कारण बेहोश हो गई। कुछ देर बाद होश आने पर उसे घर भेज दिया गया। इस घटना ने भीषण गर्मी के बीच विद्यालय संचालन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
कहीं स्वागत, कहीं नहीं पहुंचे विद्यार्थी
कई विद्यालयों में शिक्षकों ने बच्चों का रोली-टीका, पुष्प और मिठाई देकर स्वागत किया। बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय आने और पढ़ाई में मन लगाने के लिए प्रेरित किया गया। हालांकि कुछ स्कूलों में शिक्षक तो पहुंचे, लेकिन विद्यार्थी नहीं आए।
जनगणना ड्यूटी का भी पड़ा असर
कई विद्यालयों में शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हुई। कुछ स्कूलों में सभी शिक्षक जनगणना कार्य में लगे होने से शिक्षण कार्य शुरू नहीं हो सका। कई स्थानों पर बच्चों को वापस लौटना पड़ा।
अभिभावकों में चिंता
अभिभावकों का कहना है कि भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच छोटे बच्चों को विद्यालय भेजना कठिन हो रहा है। कई अभिभावकों ने विद्यालयों के समय में बदलाव अथवा ग्रीष्मावकाश बढ़ाने की मांग भी उठाई है।
बीएसए ने दी सफाई
बेसिक शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि जनगणना कार्य से जुड़े कुछ विद्यालयों में अस्थायी समस्या आई है। जैसे-जैसे जनगणना कार्य पूरा होगा, शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी और विद्यालयों में पठन-पाठन सामान्य रूप से संचालित होगा।
गर्मी, कम उपस्थिति और जनगणना ड्यूटी के कारण परिषदीय विद्यालयों का पहला दिन मिश्रित रहा। अब आने वाले दिनों में छात्रों की उपस्थिति और शिक्षण व्यवस्था पर सभी की नजर रहेगी।

